केंद्र ने लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों एवं विधायी निकाय का प्रस्ताव दिया : कार्यकर्ता
दिलीप
- 23 May 2026, 05:57 PM
- Updated: 05:57 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) लद्दाख के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कहा कि केंद्र ने छठी अनुसूची के बजाय संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों और इस क्षेत्र के लिए एक विधायी निकाय का प्रस्ताव दिया है।
साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत अभी जारी है तथा अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
गृह मंत्रालय की एक उप-समिति के साथ अपनी बैठक के एक दिन बाद कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि सरकार ने अनुच्छेद 371 ए और 371 जी की तर्ज पर लद्दाख के लिए सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव दिया है और वह केवल जिला परिषदों तक शक्तियों को सीमित करने के बजाय पूरे क्षेत्र के लिए एक शासन संरचना पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई है।
'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (केडीए) के सदस्य सज्जाद कारगिली ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि केंद्र ने लद्दाख के लिए विधायी, कार्यकारी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां प्रस्तावित की हैं तथा उनसे कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों के साथ परामर्श के लिए एक औपचारिक मसौदा साझा करने को कहा गया है।
शुक्रवार को 'लेह एपेक्स बॉडी' (एलएबी) एवं केडीए के प्रतिनिधियों और गृह मंत्रालय की उप-समिति के बीच हुई बैठक में लद्दाख के संवैधानिक संरक्षण, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और राज्य का दर्जा देने की लंबे समय से लंबित मांग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वांगचुक के अनुसार, चर्चा लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने पर केंद्रित थी, जबकि सरकार ने अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों का सुझाव दिया।
वांगचुक ने कहा, ''सरकार ने कहा कि उसे छठी अनुसूची से कुछ आपत्तियां हैं, लेकिन वह अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों पर विचार करने को तैयार है।''
अनुच्छेद 371 कुछ राज्यों को उनकी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान प्रदान करता है।
छठी अनुसूची के तहत, पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्त जिला परिषदों के माध्यम से विशेष प्रशासनिक और विधायी संरक्षण प्रदान किया जाता है, जिन्हें भूमि, वन, स्थानीय शासन व्यवस्था, रीति-रिवाजों और कुछ नागरिक एवं न्यायिक मामलों पर अधिकार प्राप्त हैं।
केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वांगचुक ने बताया कि पहले के प्रस्तावों में लेह और कारगिल की जिला परिषदों तक ही शक्तियां सीमित रखने की परिकल्पना की गई थी, जबकि प्रमुख निर्णय उपराज्यपाल और नौकरशाही के पास ही रहेंगे।
उन्होंने कहा, ''कल, वे इस बात पर सहमत हुए कि जो भी संवैधानिक व्यवस्था बनाई जाएगी, वह पूरे लद्दाख के स्तर पर होगी, न कि जिला स्तर पर।''
उन्होंने इसे पहले के प्रस्तावों से एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
उन्होंने कहा, ''भारत में सबसे अच्छी व्यवस्था राज्य की है। हम विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश या राज्य का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।''
भाषा राजकुमार दिलीप
दिलीप
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