उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम में सपा पार्षद ने ली शपथ
जोहेब
- 24 May 2026, 03:16 PM
- Updated: 03:16 PM
लखनऊ, 24 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के ललित किशोर तिवारी ने रविवार को लखनऊ नगर निगम के पार्षद के रूप में शपथ ले ली। शपथ में देरी के कारण उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पहले महापौर सुषमा खरकवाल की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर रोक लगा दी थी।
शपथ ग्रहण समारोह वार्ड नंबर 73, फैजुल्लागंज से जुड़े मामले में अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए आयोजित किया गया।
समारोह के बाद महापौर सुषमा खरकवाल ने कहा, "उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आज शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। अदालत ने निर्देश दिया था कि शपथ दिलाई जाए, इसलिए आज यह समारोह हुआ।"
देरी का कारण बताते हुए महापौर ने कहा, "हमारा कार्यक्रम एक महीने पहले ही तय हो चुका था। अचानक 'बड़ा मंगल' के दिन मैं बीमार पड़ गई और मुझे कमांड अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। शनिवार शाम मुझे अस्पताल से छुट्टी मिली और आज हमने ललित किशोर तिवारी को शपथ दिलाई।"
दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 21 मई को महापौर की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों पर तब तक के लिए रोक लगा दी थी, जब तक तिवारी को शपथ नहीं दिला दी जाती।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एस. क्यू. एच. रिज़वी की पीठ ने यह आदेश ललित किशोर तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था। तिवारी उच्च न्यायालय के वकील होने के साथ-साथ अवध बार एसोसिएशन के महासचिव भी हैं।
पीठ ने शपथ में देरी पर कड़ा रुख अपनाया था, जबकि चुनाव ट्रिब्यूनल की ओर से तिवारी को वार्ड नंबर 73 से निर्वाचित घोषित किए पांच महीने बीत चुके थे। लखनऊ पीठ ने पहले निर्देश दिया था कि यदि एक सप्ताह में शपथ नहीं दिलाई जाती तो महापौर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
सुनवाई के दौरान, शपथ न दिलाए जाने की जानकारी मिलने पर पीठ ने नाराजगी जताई और महापौर की शक्तियां निलंबित कर दीं। इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी।
यह विवाद वार्ड नंबर 73, फैजुल्लागंज के नगर निगम चुनाव से जुड़ा है। चुनाव में भाजपा उम्मीदवार प्रदीप कुमार शुक्ला को 4,972 वोट और सपा उम्मीदवार ललित तिवारी को 3,298 वोट मिले थे। 19 दिसंबर को चुनाव ट्रिब्यूनल ने माना कि शुक्ला चुनावी कागजों में जरूरी जानकारी देने में नाकाम रहे, जिसे कदाचार मानते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया गया।
बाद में शुक्ला ने उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन 20 मई को वकील द्वारा याचिका वापस लेने की अनुमति मांगने पर याचिका खारिज कर दी गई।
भाषा किशोर आनन्द
जोहेब
जोहेब
2405 1516 प्रयागराज