कांगो में युवकों का अस्पताल पर हमला, इबोला संक्रमित अपने परिजनों के शव सौंपने की मांग की
खारी
- 25 May 2026, 09:07 AM
- Updated: 09:07 AM
किंशासा, 25 मई (एपी) पूर्वी कांगो में रविवार शाम गुस्साए युवकों ने एक अस्पताल पर धावा बोल दिया जहां इबोला वायरस से संक्रमित मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इलाके में गोलियां चलने की आवाज सुनी गईं जिससे अस्पताल में भगदड़ मच गई, चिकित्साकर्मी लोगों को निकालने की कोशिश में जुट गए तथा अफरा-तफरी का माहौल हो गया।
यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि मोनबगवालू जनरल अस्पताल पर हुए हमले में कोई घायल हुआ है या नहीं, लेकिन अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. रिचर्ड लोकुडु ने 'एसोसिएटेड प्रेस' (एपी) को बताया कि हमलावर अपने दो परिजनों के शव सौंपने की मांग कर रहे थे।
लोकुडु ने फोन पर बताया कि गोलीबारी के बीच चिकित्साकर्मी मरीजों और कर्मचारियों को निकालने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ''मोनबगवालू जनरल अस्पताल में अलर्ट जारी कर दिया गया है।'' उन्होंने घटनाक्रम के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी।
एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों पर इस तरह का यह तीसरा हमला है, जहां चिकित्साकर्मी संदिग्ध इबोला मामलों के इलाज के लिए संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इबोला से मरने वालों के शव अत्यधिक संक्रामक हो सकते हैं और अगर उन्हें दफनाने की तैयारी करने तथा अंतिम संस्कार के दौरान लोग इकट्ठा होते हैं तो इससे संक्रमण और फैल सकता है।
कांगो के अधिकारियों ने आदेश दिया है कि इबोला के संदिग्ध पीड़ितों को दफनाने का खतरनाक काम जहां तक हो सके, सरकारी निगरानी में किया जाए, लेकिन इस व्यवस्था से मृतकों के परिवारजन में खासी नाराजगी है।
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वायरस के प्रसार को रोकने के प्रयास के तहत पूर्वोत्तर कांगो में अंतिम संस्कार और प्रार्थना सभा में 50 से अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध रहेगा।
मोनबगवालू के निवासियों के एक समूह ने शनिवार को 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' मानवीय समूह द्वारा इबोला संदिग्ध और पुष्ट इबोला मामलों के लिए स्थापित एक तंबू पर हमला किया और उसमें आग लगा दी।
लोकुडु ने पहले कहा था कि उस हमले के दौरान संदिग्ध तौर पर इबोला संक्रमण से ग्रस्त 18 लोग केंद्र से बाहर निकल गए और अब उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
बृहस्पतिवार को रवाम्पारा कस्बे में एक और उपचार केंद्र को आग लगा दी गई, जब इबोला संक्रमण से जान गंवाने वाले एक स्थानीय व्यक्ति के शव को परिवार वालों को ले जाने से मना कर दिया गया।
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि यह प्रकोप कांगो के लिए ''बहुत उच्च'' जोखिम वाला है जो पहले ''उच्च'' श्रेणी में था। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बीमारी के फैलने का जोखिम कम है।
इससे पहले रविवार को कांगो के संचार मंत्रालय ने 'एक्स' पर बताया कि इबोला के 904 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से अधिकतर पूर्वोत्तर प्रांत इटुरी से हैं। यह संख्या पहले घोषित 700 से अधिक संदिग्ध इबोला मामलों की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है।
एपी सुरभि खारी
खारी
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