हिमाचल सरकार ने संजय गुप्ता को मुख्य सचिव नियुक्त किया; भाजपा, माकपा ने विरोध किया
पवनेश
- 26 May 2026, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
शिमला, 26 मई (भाषा) हिमाचल प्रदेश सरकार ने 1988 बैच के आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया है, जिनके पास वर्तमान में इस पद का अतिरिक्त प्रभार है। यह जानकारी मंगलवार को यहां जारी एक अधिसूचना में दी गई।
पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना के 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने के बाद, गुप्ता को एक अक्टूबर, 2025 को मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। गुप्ता को 31 मई को उनकी सेवानिवृत्ति से पांच दिन पहले नियमित मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया है।
पांच जून, 1966 को जन्मे गुप्ता के पास सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री और प्रबंधन में डिप्लोमा है।
गुप्ता की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की प्रदेश समिति द्वारा उन्हें कार्यवाहक मुख्य सचिव पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने की मांग किए जाने के दो दिन बाद जारी की गई।
माकपा नेता और शिमला नगर निगम के पूर्व महापौर संजय चौहान ने कहा, ''इस फैसले ने राज्य में कांग्रेस सरकार के कामकाज पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है क्योंकि सोलन जिले की चेस्टर हिल रियल एस्टेट परियोजना में अनियमितताओं के संबंध में गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।''
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार को ''कतई बर्दाश्त नहीं करने'' की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उसने एक ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया है जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले लंबित हैं और जिसके आचरण पर अदालत ने भी सवाल उठाए हैं।
पार्टी ने चेस्टर हिल परियोजना के प्रवर्तकों के खिलाफ किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के उल्लंघन के आरोपों की न्यायिक जांच की मांग की थी।
इससे पहले, अधिवक्ता विनय शर्मा ने 24 मार्च को सोलन में चेस्टर हिल 2 और चेस्टर हिल 4 के नाम पर बेनामी भूमि लेनदेन में शामिल सरकारी अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
गुप्ता सभी आरोपों का खंडन करते रहे हैं। उनका कहना है उन्हें बदनाम करने के लिए दो पूर्व मुख्य सचिवों द्वारा साजिश रची गई।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू नौकरशाहों की कठपुतली बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मोड़ पर जब गुप्ता की नियुक्ति को जनहित याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है, उन्हें स्थायी मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त करना सरकार के इरादों के बारे में गंभीर सवाल खड़े करता है।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तीन तीन प्राथमिकी दर्ज हैं और उनका नाम 'चेस्टर हिल' बेनामी संपत्ति मामले के संबंध में भी सामने आया है।
उन्होंने दावा किया कि इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि इन अधिकारियों के पास कांग्रेस नेताओं और उनके करीबी लोगों से संबंधित गहरे रहस्य हैं।
ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री इतने ''बेबस'' हैं कि वे प्रभावी रूप से भ्रष्ट अधिकारियों को पुरस्कृत कर रहे हैं और यहां तक कि उनकी सेवा अवधि बढ़ाने या सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें फिर से नियुक्त करने पर भी विचार कर रहे हैं।
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