औद्योगिक उत्पादन वृद्धि अप्रैल में घटकर 4.9 प्रतिशत पर
अजय
- 01 Jun 2026, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि अप्रैल में सालाना आधार पर घटकर 4.9 प्रतिशत रही। पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि में नरमी के कारण औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि कम रही है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
आधार वर्ष को संशोधित कर 2022-23 करने और सूचकांक में शामिल मदों को व्यवस्थित करने के बाद पहली बार यह आंकड़ा जारी किया गया है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में मापे जाने वाले औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि अप्रैल, 2025 में 5.7 प्रतिशत रही थी। मार्च, 2026 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत थी।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''विनिर्माण क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के कारण, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) ने अप्रैल, 2026 में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।''
बयान के अनुसार अप्रैल, 2026 के लिए चार क्षेत्रों... खनन और उत्खनन, विनिर्माण, बिजली और गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति, दूषित जल और अपशिष्ट प्रबंधन... की वृद्धि दर क्रमशः (-) 5.1 प्रतिशत, 6.2 प्रतिशत, 4.9 प्रतिशत और 6.6 प्रतिशत रही।
बयान में कहा गया है कि आईआईपी 118.9 रहने का अनुमान है जो अप्रैल, 2025 में 113.1 था।
मंत्रालय ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। वस्तुओं की संशोधित सूची में 1,042 उत्पाद शामिल हैं जिन्हें 463 मद समूहों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें 120 नए मद समूह शामिल हैं।
आधार वर्ष संशोधन का यह कार्य अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आधार वर्ष संशोधन को लेकर तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी-आईआईपी) के अंतर्गत किया गया है।
समिति की रिपोर्ट 25 मई, 2026 को जारी की गई। इसने भारत में औद्योगिक उत्पादन के अधिक सुदृढ़, प्रासंगिक और व्यापक माप की नींव रखी।
यह आईआईपी के आधार वर्ष का 10वां संशोधन है। पहला आईआईपी 1937 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया था।
मंत्रालय के अनुसार, नई आईआईपी श्रृंखला नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन, गैस आपूर्ति, ईंधन खनिज, धात्विक और अधात्विक खनिज, जल आपूर्ति, दूषित जल और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग-अलग सूचकांकों के साथ अधिक विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
नई आईआईपी श्रृंखला में कुल 120 नए मद समूह जोड़े गए हैं, जिनमें 'मैग्नेटिक' पट्टी वाले कार्ड (डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड), सीसीटीवी कैमरा, गैर-बुने हुए वस्त्रों की वस्तुएं, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, स्टेंट और टीके शामिल हैं।
साथ ही, केरोसिन, फ्लोरोसेंट ट्यूब और सीएफएल, साइकिल/ट्राइसाइकिल/रिक्शा/एलएमवी टायरों के लिए ट्यूब, प्रिंटिंग मशीनरी और सिलाई मशीन सहित 64 मद समूहों को हटा दिया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि विस्तारित वस्तुओं से प्रतिनिधित्व में सुधार होता है, औद्योगिक उत्पादन में विविधता को बेहतर ढंग से दर्शाया जाता है और उभरते औद्योगिक उत्पादों और प्रौद्योगिकियों को प्रतिबिंबित किया जाता है। आईआईपी को संदर्भ माह से 28 दिन के अंतराल के साथ हर महीने जारी किया जाएगा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने संवाददाताओं से कहा नई आईआईपी श्रृंखला पिछली श्रृंखला की कमियों को दूर करती है। इसमें लघु खनिजों को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि नई श्रृंखला में प्लास्टिक, रबड़ और वाहन को अधिक महत्व दिया गया है।
सचिव ने कहा, ''पिछले आईआईपी में आंकड़ों के स्तर पर जो कमियां थीं, उसे हमने दूर दिया है।''
नई आईआईपी श्रृंखला के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में, 23 उद्योग समूहों में से 17 ने अप्रैल, 2026 में अप्रैल, 2025 की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। अप्रैल, 2026 के दौरान शीर्ष तीन योगदानकर्ता... मोटर वाहन, ट्रेलर और 'सेमी-ट्रेलर' का विनिर्माण (12.7 प्रतिशत), विद्युत उपकरण का विनिर्माण (19.2 प्रतिशत) और मशीनरी और उपकरण का विनिर्माण (12.9 प्रतिशत) हैं।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, अप्रैल, 2026 में सालाना आधार पर प्राथमिक वस्तुओं में 0.8 प्रतिशत, पूंजीगत वस्तुओं में 16 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं में 7.7 प्रतिशत, अवसंरचना/निर्माण वस्तुओं में 7.1 प्रतिशत, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में 4.3 प्रतिशत और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि रही।
अप्रैल, 2026 के दौरान आईआईपी वृद्धि में योगदान देने वाले तीन प्रमुख क्षेत्रों में मध्यवर्ती वस्तुएं, पूंजीगत वस्तुएं और अवसंरचना/निर्माण वस्तुएं थीं।
नई श्रृंखला में, 2011-12 के आधार वर्ष वाली श्रृंखला की तुलना में भारांश को संशोधित किया गया है।
'खनन और उत्खनन' का भार पुरानी श्रृंखला में 14.37 से घटाकर नई श्रृंखला में 11.05 किया गया है। 'विनिर्माण' के मामले में इसे 77.63 से घटाकर 76.062 किया गया है।
'बिजली और गैस आपूर्ति' के मामले में, भारांश 7.99 से बढ़ाकर 10.86 कर दिया गया है।
'जल आपूर्ति, दूषित जल और अपशिष्ट प्रबंधन' को 2.02 का भारांश दिया गया है। यह आईआईपी श्रृंखला में एक नई प्रविष्टि है।
सांख्यिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पुरानी श्रृंखला के तहत, मंत्रालय राज्यों के साथ भी काम कर रहा था। लगभग 24 राज्य पहले से ही अपने राज्य-स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) तैयार कर रहे हैं।
मंत्रालय शेष राज्यों के साथ इस बारे में बात कर रहा है।
नई श्रृंखला के बारे में इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि नई आईआईपी श्रृंखला में कई बदलावों को ध्यान में रखा गया है। इनमें वस्तुओं की सूची का संशोधन, क्षेत्रवार भारांश में परिवर्तन और रिपोर्टिंग कारखानों की संख्या में वृद्धि शामिल है।
उन्होंने कहा, ''दिलचस्प बात यह है कि इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में औद्योगिक उत्पादन में पहले के अनुमानों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक तेज वृद्धि हुई है। विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र ने इन दोनों वर्षों में कहीं अधिक वृद्धि दर दर्ज की है।
नायर ने कहा, ''इससे इन वर्षों के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के अनुमान में कुछ वृद्धि हो सकती है।''
भाषा रमण अजय
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