न्यायालय ने अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक परिदृश्य से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया
माधव
- 02 Jun 2026, 04:49 PM
- Updated: 04:49 PM
नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) तमिलनाडु में अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक परिदृश्य के संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमणों का गंभीर संज्ञान लेते हुए, उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि समयबद्ध अतिक्रमण रोधी योजना तैयार की जाए और उसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि वहां अतिक्रमण करने वाले सभी 118 सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अगस्त्यमलाई परिदृश्य के संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा जारी विशिष्ट निर्देशों और उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के बावजूद कई दशकों से जारी है और बढ़ता ही जा रहा है। इस संरक्षित क्षेत्र में कलाकड़ मुंडनथुरई बाघ अभयारण्य, श्रीविल्लिपुथुर-मेगामलाई बाघ अभयारण्य और कन्याकुमारी वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
न्यायालय ने तमिलनाडु में आरक्षित वनों, वन्यजीव अभयारण्यों और बाघ अभयारण्यों के संरक्षण से संबंधित मुद्दों सहित कई मुद्दों को उठाने वाली याचिका पर 29 मई को अपना फैसला सुनाया।
इसमें कहा गया है कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की जुलाई 2025 की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक परिदृश्य 3,500.36 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें तमिलनाडु और केरल के कई जिले शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि थेनी जिले के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, जिले में आरक्षित वनों में कुल 4,601 अतिक्रमणकारियों ने 5,072.653 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया है और अब तक कुल अतिक्रमित वन भूमि का केवल 1.8 प्रतिशत ही पुनः प्राप्त किया जा सका है।
पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, 116 सरकारी और सार्वजनिक उपयोगिता संरचनाओं का निर्माण वन भूमि के अंदर बिना पूर्व अनुमति के किया गया।
न्यायालय ने कहा, "चिंताजनक रूप से, अतिक्रमणकारियों के रूप में सूचीबद्ध कुल 118 व्यक्तियों की पहचान सेवारत या सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के रूप में की गई है, जिनमें सेना, पुलिस, सीआरपीएफ, वन विभाग, राजस्व विभाग, बिजली बोर्ड, आंगनवाड़ी, स्कूल शिक्षा, पंचायत, सर्वेक्षण विभाग और अन्य सेवाओं के कर्मी शामिल हैं।"
इसमें कहा गया है कि राज्य ने हालांकि नोटिस जारी करने और ऐसे अधिकारियों से 15 हेक्टेयर भूमि को पुन: प्राप्त करने समेत कई कदम उठाए हैं, लेकिन काफी संख्या में अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही अब भी लंबित है।
न्यायालय ने कहा, "समयबद्ध, मंडलवार अतिक्रमण हटाने की योजना तैयार की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा, जिसमें स्पष्ट समयसीमा, मापने योग्य लक्ष्य और अधिकारी स्तर पर जिम्मेदारियां निर्धारित होंगी। उक्त योजना को एक माह के भीतर सीईसी के समक्ष रखा जाएगा।"
पीठ ने कहा कि वन क्षेत्रों के भीतर स्थित सभी सरकारी प्रतिष्ठानों, सुविधाओं और अनधिकृत बुनियादी ढांचे को छह महीने के भीतर बंद कर दिया जाएगा, स्थानांतरित कर दिया जाएगा, ध्वस्त कर दिया जाएगा और वन भूमि से हटा दिया जाएगा।
इसने राज्यों को सीईसी को मासिक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
पीठ ने सीईसी को जमीनी सत्यापन करने और सभी निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित होने तक त्रैमासिक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने सीईसी को 28 अगस्त तक सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा और मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को तय की।
भाषा प्रशांत माधव
माधव
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