पश्चिम बंगाल में बजट-पूर्व बैठक, उद्योग संगठनों ने निवेश व सुधार पर दिया जोर
अजय
- 02 Jun 2026, 06:21 PM
- Updated: 06:21 PM
कोलकाता, दो जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग ने उद्योग मंडलों एवं व्यापार संघों के साथ मंगलवार को बजट-पूर्व परामर्श बैठक आयोजित की। इसमें हितधारकों ने निवेश बढ़ाने, कारोबार सुगमता और अवसंरचना विकास के उपायों पर जोर दिया।
यह बैठक अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) प्रभात कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में हुई। इसमें भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स, क्रेडाई, एसोचैम, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) सहित प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में राज्य कर आयुक्त खालिद अनवर समेत राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग और व्यापार संगठनों से सुझाव मांगे।
एक सूत्र ने कहा, '' बैठक मुख्य रूप से परामर्शात्मक थी। विभिन्न मंडलों और व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों ने आगामी बजट से अपनी अपेक्षाएं तथा विचार साझा किए।''
चर्चा के दौरान उठाए गए मुद्दों में निवेश प्रोत्साहन, हल्दिया औद्योगिक क्षेत्र का विकास, सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा, व्यापार लाइसेंस प्रक्रियाओं का सरलीकरण, एकल-खिड़की निपटान (सिंगल-विंडो क्लियरेंस) तंत्र को मजबूत करना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा रियल एस्टेट व निर्माण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अपनी सिफारिशों वाला ज्ञापन सौंपा और राज्य में कारोबारी माहौल सुधारने के लिए आवश्यक प्रमुख नीतिगत उपायों पर प्रस्तुति भी दी।
राज्य का बजट 22 जून को पेश किया जाना निर्धारित है जबकि विधानसभा का बजट सत्र 18 जून से शुरू होगा।
राज्य में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा वित्त मंत्री की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। पार्टी विधायकों ने संकेत दिया कि सोमवार को 35 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद विस्तारित मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा बुधवार को किया जा सकता है।
उद्योग संगठन सरकार की भूमि एवं औद्योगिक नीतियों के प्रति रुख पर भी नजर बनाए हुए हैं।
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भूमि सीमा कानून की समीक्षा की वकालत की थी और कहा था कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए भूमि तक आसान पहुंच जरूरी है।
भट्टाचार्य ने निवेश परियोजनाओं के लिए अधिक उद्योग-अनुकूल नीतिगत ढांचे और तेज मंजूरी प्रक्रिया का भी समर्थन किया था। साथ ही जोर दिया था कि औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।
भाषा निहारिका अजय
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0206 1821 कोलकाता