बीएस-4 से बीएस-6: दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ परिवहन के लिए कैबिनेट की मंजूरी
माधव
- 03 Jun 2026, 05:22 PM
- Updated: 05:22 PM
नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुराने ट्रक और बस को बदलने की एक योजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। इस कदम का उद्देश्य क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।
इस योजना का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत उन ट्रक और बस के मालिकों को प्रोत्साहन देना है, जो बीएस-4 या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों का अनुपालन करते हैं, ताकि वे अपने वाहनों को बीएस-6 या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से बदल सकें।
एक बयान के अनुसार, केंद्र सरकार पांच साल के लिए ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, वाहन श्रेणी के आधार पर 4,800 रुपये तक के मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने या जमा प्रमाणपत्र के व्यापार के लिए एकमुश्त लाभ प्रदान करेगी।
इस योजना से दिल्ली और एनसीआर राज्यों-हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश- में लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों (1.91 लाख ट्रक और 16,329 बस) को लाभ होगा।
इस योजना पर कुल 9,585 करोड़ रुपये का वित्तीय व्यय आएगा, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 5,041 करोड़ रुपये तथा राज्यों द्वारा कर रियायतों के रूप में लगभग 1,601 करोड़ रुपये शामिल हैं।
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
सरकार ने कहा कि इस योजना को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा तथा इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) द्वारा किया जाएगा।
यह योजना हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली सहित भागीदार राज्यों के सहयोग से लागू की जाएगी।
बीएस-3 या उससे पुराने वाहनों के लिए पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं में स्क्रैपिंग अनिवार्य होगी, जबकि बीएस-4 वाहनों को या तो स्क्रैप किया जा सकेगा या एनसीआर के बाहर गैर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शहरों या कस्बों में बेचा जा सकेगा।
इसके बाद वाहन मालिकों को एनसीआर के भीतर बीएस-6 या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर उनका पंजीकरण कराना होगा।
हालांकि, दिल्ली में इस योजना के तहत खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक होने चाहिए, जबकि बस केवल बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक होनी चाहिए। सरकारी वाहन इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
सरकार ने कहा कि स्वच्छ परिवहन प्रौद्योगिकी की ओर तेजी से बदलाव के माध्यम से यह योजना वाहन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाने और दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी।
राज्य सरकारें नए वाहनों पर पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी तथा 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत तक छूट और पुराने वाहनों के लिए 50 प्रतिशत तक रियायत देंगी।
वे योजना में शामिल पुराने वाहनों की लंबित देनदारियों को भी माफ करेंगी। भागीदार ऑटो ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) एक्स-शोरूम कीमतों पर 8 प्रतिशत की छूट देंगे।
इस योजना का क्रियान्वयन एकीकृत पोर्टल के माध्यम से पूर्णतः डिजिटल होगा, जिससे वास्तविक समय में पात्रता जांच, स्वचालित ब्याज अनुदान दावे, मासिक ईंधन वाउचर क्रेडिट और प्रदूषण कमी के परिणामों की निगरानी संभव होगी।
केंद्र सरकार के लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख से पांच वर्षों तक जारी रहेंगे, जिससे दो वर्ष की नामांकन अवधि के बाद भी इसका प्रभाव बना रहेगा।
योजना की निगरानी एक सशक्त समिति द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे तथा इसमें नीति आयोग के सीईओ, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव, दिल्ली-एनसीआर के राज्यों के मुख्य सचिव सदस्य होंगे, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के सदस्य सचिव सदस्य-संयोजक होंगे।
जिला स्तर पर जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट को योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बयान में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण विशेषकर सर्दियों के महीनों में गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।
भाषा अमित माधव
माधव
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