पंत को अपने 50वें टेस्ट पहले गंभीर से मिली सलाह
मोना
- 04 Jun 2026, 06:34 PM
- Updated: 06:34 PM
(कुशान सरकार)
मुल्लांपुर, चार जून (भाषा) ऋषभ पंत के लॉफ्टेड शॉट में अब भी वही रोमांच है लेकिन 50वें टेस्ट से दो दिन पूर्व इस विकेटकीपर बल्लेबाज को अलग रवैया अपनाते हुए देखा गया।
अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच से पहले भारत के ट्रेनिंग सत्र के दौरान यह विकेटकीपर-बल्लेबाज अपनी बॉडी लैंग्वेज और इरादों दोनों में ही अधिक संयमित नजर आया। ऐसा लग रहा था कि वह मुख्य कोच गौतम गंभीर की सलाह पर अमल कर रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट जगत में यह किसी से छिपा नहीं है कि गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के पिछले टेस्ट मैच के दौरान पंत के गैरजिम्मेदाराना शॉट चयन से गंभीर काफी नाराज थे। दोनों ही पारियों में पंत का आउट होना चर्चा का विषय बन गया और उस समय उनकी काफी आलोचना हुई जब टीम अपने एक सीनियर खिलाड़ी से अधिक जिम्मेदारी की उम्मीद कर रही थी।
नेट में पंत जब स्पिनरों का सामना कर रहे थे तो उनका पूरा ध्यान मजबूत डिफेंस पर था और इस दौरान गंभीर की पैनी नजर उन पर टिकी हुई थी।
सहायक कोच रेयान टेन डोएशे से जब पूछा गया कि पंत उप कप्तानी से हटाए जाने सहित अन्य बदलावों से कैसे निपट रहे हैं तो उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि वह अच्छे आदर्श और सीनियर खिलाड़ी की भूमिका निभाने को लेकर प्रतिबद्ध है। दरअसल, कल मैंने उन्हें और गौती (गौतम गंभीर) को इसी बारे में बात करते हुए सुना था। वे इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि 'एक सीनियर खिलाड़ी के तौर पर आप खुद को कैसे पेश करना चाहते हैं', जिसमें बातचीत का तरीका और आप किस तरह से खेलेंगे जैसी बातें शामिल थीं।''
उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि इस तरह के एलीट ढांचे में नेतृत्वकर्ता बनने के लिए उसे किसी औपचारिक जिम्मेदारी की जरूरत है और मुझे लगता है कि ऋषभ यह बात समझता है।''
पंत का खेल कभी-कभी हीरो बनने और अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के बीच की महीन रेखा पर चलता है, एक ऐसी चीज जिसकी वजह से उन्हें बराबर मात्रा में प्यार और नफरत दोनों मिलते हैं।
टेन डोएशे नहीं चाहते कि वह अपनी शानदार प्रतिभा पर लगाम कसें लेकिन टीम प्रबंधन चाहता है कि वह मैच की स्थितियों के हिसाब से अपनी जल्दबाजी में थोड़ी कमी लाएं।
उन्होंने कहा, ''ऋषभ की शानदार काबिलियत को देखते हुए हम उनसे वह सब कुछ छीनना नहीं चाहते जो वह करते हैं लेकिन अगर कभी-कभार वह अपने खेल को मैच की स्थितियों के हिसाब से थोड़ा और ढाल सकें तो मुझे लगता है कि आप उन्हें इस चीज पर काम करते हुए जरूर देखेंगे।''
भाषा सुधीर मोना
मोना
0406 1834 मुल्लांपुर