ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर टीएमसी के बागी खेमे में मतभेद के संकेत
शफीक
- 04 Jun 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
कोलकाता, चार जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक दल पर 58 बागी विधायकों के नियंत्रण के एक दिन बाद, रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में मतभेद के संकेत उभरने लगे हैं। कई विधायकों ने कहा कि ममता बनर्जी को ही पार्टी का सर्वोच्च नेता बनाए रखना चाहिए, और आगाह किया कि यदि उनकी भूमिका केवल सलाहकार तक सीमित कर दी गई, तो वे गुट में अपनी स्थिति पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
नवनियुक्त विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई में बागी विधायक दल की बैठक के बाद ये अलग-अलग राय सामने आईं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बागी खेमे के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। एक ओर वे टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से दूरी बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के साथ अपने राजनीतिक और भावनात्मक संबंधों को भी बनाए रखना चाहते हैं।
बागी विधायक गुलशन मलिक ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ''हमें बताया गया था कि पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। वह केवल सलाहकार नहीं हैं। हम चाहते हैं कि पार्टी उनके नेतृत्व में ही काम करे।''
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब रिताब्रता बनर्जी ने बुधवार को कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पुनर्गठित विधायक दल की ''मुख्य सलाहकार'' की भूमिका निभानी चाहिए।
पंचला से विधायक मलिक ने कहा, ''अगर ममता बनर्जी को सर्वोच्च नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है, तो हमें सोचना होगा कि हमें इस खेमे में रहना चाहिए या नहीं।''
उनकी टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में विधायक दल पर नियंत्रण बनाने वाले 58 बागी विधायकों में से कई ने बगावत के दौरान बार-बार कहा कि उनकी लड़ाई ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। उनका कहना था कि वे ममता के भतीजे और पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ हैं।
बागी विधायक संगीता रॉय बसुनिया ने भी यही राय जताई। सिताई से विधायक बसुनिया ने कहा, ''ममता बनर्जी हमारी सर्वोच्च नेता हैं और आगे भी रहेंगी। उन्हें केवल सलाहकार नहीं बनाया जा सकता। वह हमारी नेता हैं।''
रिताब्रता के बयान को बागी खेमे की उस कोशिश के रूप में देखा गया, जिसका उद्देश्य बगावत के राजनीतिक प्रभाव को कम करना और टीएमसी के कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाना था कि वे पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि अन्य मुद्दों को लेकर उनका विरोध है।
हालांकि, बृहस्पतिवार को सामने आए बयानों से संकेत मिलता है कि बागी खेमे का एक वर्ग ममता बनर्जी की भूमिका या अधिकार को कमतर दिखाने वाली किसी भी व्यवस्था से असहज है।
बृहस्पतिवार को हुई बैठक में बागी विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों, पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ लंबित मामलों तथा अपने जिलों को प्रभावित करने वाली प्रशासनिक समस्याओं पर भी चर्चा की।
गुलशन मलिक ने बताया कि इन मुद्दों को राज्य सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है।
बुधवार को 58 विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस विधायक दल पर नियंत्रण स्थापित कर लिया, निष्कासित नेता रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से इसकी मान्यता भी प्राप्त कर ली।
भाषा आशीष शफीक
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