श्रीलंका : वृद्धाश्रम में भीषण आग, 12 लोगों की मौत; संचालक गिरफ्तार
माधव
- 04 Jun 2026, 10:35 PM
- Updated: 10:35 PM
कोलंबो, चार जून (भाषा) श्रीलंका में एक वृद्धाश्रम में आग लगने से कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई जबकि सात अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, 'सेनेहासे कडल्ला मावुपिया सावाना' (स्नेह का घोंसला) नामक वृद्धाश्रम के संचालक को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में एक मजिस्ट्रेट ने उसे 11 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
यह आग बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे कोलंबो से लगभग 65 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित कालुतारा जिले के अंगुरुवातोटा क्षेत्र में स्थित वृद्धाश्रम में लगी।
पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से 10 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि दो अन्य की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। उन्हें होराना बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आग लगने के समय वृद्धाश्रम में 70 से अधिक बुजुर्ग मौजूद थे। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से आग पर काबू पाया गया।
पुलिस ने बताया कि सात घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।
कुल 51 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया और उन्हें पास के एक विद्यालय में अस्थायी रूप से ठहराया गया है।
पुलिस के अनुसार, हाल के वर्षों में आग से संबंधित मौतों की यह द्वीपीय देश की ''सबसे भीषण'' घटना है।
होराना की मजिस्ट्रेट लकमिनी विदानागामागे ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराई। पुलिस ने बताया कि उनकी मौजूदगी में मलबे से कई झुलसे हुए शव बरामद किए गए, जिनमें एक बिल्ली का शव भी शामिल था।
प्रारंभिक रिपोर्टों में आशंका जताई गई थी कि गैस सिलेंडर में विस्फोट के कारण आग तेजी से फैली होगी। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि आग लगने के वास्तविक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
निजी तौर पर संचालित इस वृद्धाश्रम के 38 वर्षीय संचालक इसुरु अनुष्का परेरा को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया गया। मजिस्ट्रेट जांच के बाद होराना की अदालत ने उसे 11 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, यह वृद्धाश्रम संबंधित सरकारी नियामक के साथ पंजीकृत नहीं था और लाभ कमाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा था।
वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के अलावा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे कुछ लोगों को भी रखा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि मानसिक रूप से पीड़ित कुछ लोगों को जंजीरों से बांधकर रखा जाता था।
एक पीड़ित के परिजन ने संवाददाताओं से कहा, ''प्रवेश के लिए 75,000 श्रीलंकाई रुपये लिए जाते थे और इसके बाद मासिक शुल्क भी देना पड़ता था।''
एक अन्य परिजन ने कहा, ''मेरी बेटी इस हादसे की शिकार हुई है। उसे जंजीर से बांधकर रखा गया था। मैं हर महीने 35,000 श्रीलंकाई रुपये देता था। जंजीर में बंधे होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।''
भाषा रवि कांत रवि कांत माधव
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