तृणमूल में अंदरूनी कलह के बीच सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसदों में भी असंतोष के संकेत दिए
वैभव
- 05 Jun 2026, 03:29 PM
- Updated: 03:29 PM
कोलकाता, पांच जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी उथल-पुथल अब राज्य विधानसभा से परे जाकर संसद तक फैलने के संकेत दे रही है। पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने शुक्रवार को संकेत दिया कि हाल में विधायकों के विद्रोह का असर पार्टी के सांसदों पर भी पड़ सकता है।
रॉय के बयान ऐसे समय आए हैं जब कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस विधायकों के एक बड़े समूह ने विधानसभा में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विधायक दल पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर लिया था। इसे तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से उसका सबसे बड़ा संगठनात्मक संकट माना जा रहा है।
एक टीवी चैनल से बातचीत में रॉय ने कहा कि विधानसभा में जिस तेजी से और बड़े पैमाने पर असंतोष सामने आया, वह अभूतपूर्व है और आने वाले महीनों में इसका असर लोकसभा में भी दिख सकता है।
उन्होंने कहा, ''मैंने कभी नहीं देखा कि इतनी बड़ी संख्या में विधायक इतनी कम अवधि में अलग रुख अपनाएं। जो हो रहा है, उसका असर लोकसभा में भी दिख सकता है।''
तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान में लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं।
रॉय ने यह भी दावा किया कि पार्टी में चल रहा घटनाक्रम करीब दो साल पहले की उनकी चेतावनी के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि 2024 में आरजी कर अस्पताल मामले के दौरान उन्होंने पहले ही संगठनात्मक टूट की आशंका जताई थी।
उन्होंने कहा, ''जो कुछ हो रहा है, वह मुझे आश्चर्यचकित नहीं करता। मैंने पहले ही कहा था कि संगठन अंततः टूट जाएगा। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।''
पार्टी नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा हमला करते हुए रॉय ने कहा कि वह औपचारिक रूप से भले ही तृणमूल कांग्रेस में हैं, लेकिन मानसिक रूप से नहीं।
उन्होंने कहा, ''शारीरिक रूप से मैं अभी भी पार्टी में हूं, लेकिन मानसिक रूप से नहीं। मैं उन लोगों के साथ क्यों रहूं जिन पर भ्रष्टाचार और गलत कामों के आरोप हैं?''
जब उनसे पार्टी के राज्यसभा सदस्यों में संभावित असंतोष के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कुछ भी स्पष्ट कहने से इनकार किया, लेकिन यह संभावना भी खारिज नहीं की।
उन्होंने कहा, ''मैं कैसे कह सकता हूं कि कल क्या होगा? अभी किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया है।''
रॉय के इन बयानों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है, खासकर ऐसे समय में जब तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद संगठनात्मक दबाव का सामना कर रही है और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के कई नेताओं ने या तो सार्वजनिक रूप से पार्टी की दिशा पर सवाल उठाए हैं या सोशल मीडिया पर ऐसे संकेत दिए हैं जिन्हें नेतृत्व की आलोचना माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो तृणमूल कांग्रेस को आने वाले समय में और बड़े संगठनात्मक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
भाषा मनीषा वैभव
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