पश्चिम एशिया से मिल रहे बदलते संकेतों के बीच सोने की कीमत में गिरावट
प्रेम
- 05 Jun 2026, 08:57 PM
- Updated: 08:57 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत घटकर 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। उतार-चढ़ाव भरे इस सप्ताह के दौरान पश्चिम एशिया से लगातार बदलते संकेतों से निवेशक परेशान रहे।
स्थानीय सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये टूटकर 1,59,900 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई, जबकि एक दिन पहले इसने 1.60 लाख रुपये का स्तर हासिल किया था।
यह गिरावट भारी उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह के बाद आई, जिसमें इस कीमती धातु की कीमत लगभग हर सत्र में कभी बढ़ी तो कभी घटी।
इस सप्ताह सोने की कीमत में 3,000 रुपये यानी लगभग दो प्रतिशत की गिरावट आई, जो कीमती धातु के बाजारों में छाई अनिश्चितता को दर्शाता है।
चांदी की कीमतों में और भी तेज गिरावट देखी गई। लगातार तीसरे सत्र में गिरावट जारी रखते हुए चांदी की कीमत 5,000 रुपये लुढ़ककर 2,60,700 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।
साप्ताहिक आधार पर, इसमें कुल 14,000 रुपये यानी 5.09 प्रतिशत की गिरावट आई है।
विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और घरेलू मुद्रा को समर्थन देने के उपायों की घोषणा के बाद मजबूत हुए रुपये के कारण सर्राफा कीमतों पर दबाव पड़ा।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और रुपये में तेज सुधार के अतिरिक्त दबाव के कारण शुक्रवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट आई।''
उन्होंने कहा कि निवेशकों ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और इस बढ़ती उम्मीद के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की कि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना मामूली रूप से गिरकर 4,470.79 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी एक प्रतिशत से अधिक गिरकर 72.89 डॉलर प्रति औंस रह गई।
कोटक सिक्योरिटीज की जिंस शोध की सहायक उपाध्यक्ष कायनात चेनवाला ने कहा, ''शुक्रवार को हाजिर सोने की कीमत में मामूली गिरावट आई और यह लगातार दूसरे सप्ताह नुकसान की ओर बढ़ रहा है।''
पिछले सत्र में सोने की कीमतों में थोड़ी राहत देखी गई, क्योंकि बॉन्ड प्रतिफल में कमी, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और वॉशिंगटन-तेहरान बातचीत को लेकर थोड़ी कूटनीतिक उम्मीद ने इसकी कीमतों को ऊपर उठाया।
हालांकि, हिज्बुल्ला द्वारा अमेरिका की मध्यस्थता में हुए इजराइल-लेबनान युद्धविराम को ठुकराते ही ये बढ़त जल्दी ही खत्म हो गई।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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