भोपाल गैस त्रासदी प्रकृति से छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण : मोहन यादव
धीरज
- 05 Jun 2026, 10:22 PM
- Updated: 10:22 PM
भोपाल, पांच जून (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को 1984 की भोपाल गैस त्रासदी को ''प्रकृति से छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण'' बताते हुए कहा कि इस भयावह घटना ने आम नागरिकों और पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया।
वर्ष 1984 में दो-तीन दिसंबर की दरमियानी रात को रात भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यंत जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था। इस हादसे में कम से कम 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग प्रभावित हुए थे। इसे दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में गिना जाता है।
यादव ने यह टिप्पणी विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। इसी मौके पर उन्होंने 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''भोपाल गैस त्रासदी प्रकृति से छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण है। यह ऐसी भयावह घटना थी, जिसने आम नागरिकों और पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया।''
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यूनियन कार्बाइड कारखाने में 40 वर्षों से पड़े अपशिष्ट का सफलतापूर्वक निपटान किया है।
यादव ने कहा, ''इससे भोपाल की धरती पर लगे गैस त्रासदी के कलंक को मिटाने में मदद मिली है। अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की भूमि के समुचित प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सांची, खजुराहो सहित विभिन्न स्थानों पर सौर, पवन, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करने का दावा करते हुए यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ''तेंदुओं के पुनर्वास के अलावा असम से जंगली भैंसों को भी राज्य में लाया गया है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा सनातन संस्कृति में निहित है।
उन्होंने कहा, ''पंचतत्वों से बने इस सृष्टि जगत के संरक्षण के लिए प्रत्येक तत्व का महत्व हमारी पूजा-पद्धति, खान-पान और प्रार्थनाओं में दिखाई देता है। सनातन संस्कृति में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान माना गया है। पर्यावरण संरक्षण हमारी जीवनशैली में परिलक्षित होता है।''
यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत प्रदेश में नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहीरवार, वन एवं पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
अहीरवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वायु, जल और वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री यादव के नेतृत्व में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान सफल रहा है। इसने जनभागीदारी के नए आयाम स्थापित किए हैं।''
भाषा दिमो धीरज
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