उप्र: वाराणसी में मांस की सभी दुकानें शहर के बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय
जितेंद्र
- 07 Jun 2026, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
वाराणसी, सात जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर निगम ने शहर को व्यवस्थित और स्वच्छ रखने की दिशा में कदम उठाते हुए अब मांस और मछली की सभी दुकानें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने का फैसला किया है।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने रविवार को बताया कि महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में शनिवार को मैदागिन स्थित टाउन हॉल भवन में हुई सदन की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी।
श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में शहर के विकास पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें मांस के बाजारों को शहर के बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में पांच स्थानों का चयन किया जा चुका है और यह सभी स्थान शहर की बाहरी सीमाओं के करीब स्थित है, जिससे आम जनता को कोई असुविधा न हो।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत आगामी दिनों में शहर के भीतर मांस की दुकानों को रामनगर, शुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा।
श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में अभी लगभग 350 से 400 मीट व मछली की दुकानें हैं।
पार्षद गुलशन अली ने नगर पालिका परिषद की बैठक में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर ले जाने का प्रस्ताव लगभग एक साल पहले लाया गया था लेकिन इसे अभी तक ठीक तरीके से लागू नहीं किया गया।
उन्होंने व्यापारियों की चिंता के बारे में बताते हुए कहा कि पवित्र श्रावण महीने के दौरान मांस की सभी दुकानों को बंद रखने से गोश्त के कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता है।
नगर आयुक्त ने इसका जवाब देते हुए सदन को भरोसा दिलाया कि शहर के बाहरी इलाके में जमीन की पहचान कर ली गई है और प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जाएगी।
नत्थूपुर में मांस की दुकान के मालिक अशरफ ने कहा कि मांस और मछली की दुकानों को शहर से बाहर ले जाने से व्यापारियों व ग्राहकों दोनों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि लोगों को मांस-मछली की खरीदारी के लिए शहर से बाहर जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन, दोनों का ही अतिरिक्त खर्च होगा।
अशरफ ने कहा, "हम चाहते हैं कि प्रशासन व्यापारियों और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोई व्यावहारिक समाधान निकाले।"
भाषा सं. सलीम जितेंद्र
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