समुद्री घोड़ों, शार्क के पंखों की तस्करी पर लगाम लगा सकता है एआई
दिलीप
- 08 Jun 2026, 05:48 PM
- Updated: 05:48 PM
(वैनिसा पिरोटा और जारा बेंडिंग, मैक्वेरी विश्वविद्यालय तथा जस्टिन ओब्रायन, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी)
सिडनी, आठ जून (द कन्वरसेशन) अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर सीमा शुल्क विभाग को यात्रियों के सामान की जांच के दौरान कई बार शार्क के पंख या समुद्री घोड़े मिलते हैं। डाक के जरिये समुद्री कर्कटी सहित अन्य जीवों की तस्करी के भी कई मामले सामने आए हैं।
इस तरह के अपराधों का पता लगाना अक्सर बेहद मुश्किल होता है। हालांकि, 'फ्रंटियर्स इन ओशन सस्टेनबिलिटी' पत्रिका में प्रकाशित एक नये अध्ययन में हमने दिखाया है कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को एक पूरक पहचान उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों और डाक सुविधाओं के जरिये समुद्री जीवों की तस्करी को रोकने में मदद मिल सके।
अरबों डॉलर का वैश्विक अपराध
-जिंदा जानवरों, पशु अंगों या उनसे संबंधित उत्पादों का सीमा पार व्यापार एक वैश्विक अपराध है, जिसके तहत हर साल अरबों अमेरिकी डॉलर का अवैध लेन-देन होता है। इसे अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ पाया गया है, जिनमें मादक पदार्थों, हथियारों और मनुष्यों की तस्करी शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) ने वन्यजीव तस्करी के पांच कारण बताए हैं : भोजन, दवा, पालतू जानवरṁ/सजावटी पौधे, विशेष संग्रह और सजावट।
कुछ मामलों में लोग जानवर पालने की इच्छा और एक विदेशी जानवर को रखने के कारण समाज में मिलने वाली कथित प्रतिष्ठा दोनों से प्रेरित होते हैं।
समुद्री जीवों की भी व्यापक तस्करी
-वन्यजीवों की तस्करी लगभग 4,000 नस्लों को प्रभावित करती है। जिन चीजों की सबसे ज्यादा तस्करी की जाती है, उनमें हाथी के दांत, गैंडों के सींग और पैंगोलिन के शल्क प्रमुख हैं।
ऑस्ट्रेलिया में हमारे सामने कई मामले आए हैं, जिनमें कुछ सरीसृप जीवों और पक्षियों को टिन में रखकर, मोजों में छिपाकर या सामान में भरकर विदेश भेजने की कोशिश की जाती है।
दुर्भाग्यवश समुद्री जीव भी निशाने पर होते हैं। तस्कर बैग में जिंदा मछलियां छिपाकर या खाने योग्य, दवाओं के निर्माण अथवा सजावटी वस्तुओं के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले समुद्री जीवों को टिन में भरकर भी ले जाते हैं। ऐसी अवैध गतिविधियां कितने बड़े पैमाने पर संचालित की जाती हैं, इसकी हमें पूरी जानकारी नहीं है।
एआई से रोकथाम में मदद की उम्मीद
-अभी वन्यजीवों की तस्करी का पता लगाने का सबसे अच्छा जरिया इंसान ही हैं। उनके बाद जैव सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक कुत्तों का स्थान आता है।
हालांकि, हाल-फिलहाल में ऑस्ट्रेलिया जमीन मार्ग से वन्यजीवों की तस्करी का पता लगाने के लिए एआई का इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाश रहा है। इसके लिए वह मौजूदा पहचान साधनों, जैसे कि 3-डी एक्सरे मशीन को खास एल्गॉरिद्म से लैस कर रहा है, जो वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम हैं।
हमने इन प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए अपने ताजा अध्ययन के दौरान विश्व-स्तरीय समुद्री वन्यजीव एल्गॉरिद्म विकसित किए। इन एल्गॉरिद्म के जरिये हमने कंप्यूटर को शार्क के पंख, समुद्री घोड़े और समुद्री कर्कटी की पहचान करना सिखाया।
हमने मृत समुद्री जीवों के कुल 68 नमूने जुटाए, जिन्हें 3-डी एक्सरे मशीन के जरिये स्कैन करके चित्रों की एक व्यापक लाइब्रेरी बनाई गई। फिर हमने इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल करके ऐसे एल्गॉरिद्म विकसित किए, जिनकी मदद से कंप्यूटर उन चीजों की पहचान कर सकें, जिन्हें खोजने की कला उन्हें सिखाई गई थी। मौजूदा मामले में इन चीजों में शार्क के पंख, समुद्री घोड़े और समुद्री कर्कटी शामिल हैं।
नमूनों को पहले अकेले और फिर अधिक जटिल परिस्थितियों में स्कैन किया गया, ताकि यह पता चल सके कि लोग वास्तव में समुद्री जीवों की तस्करी कैसे करते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी बैग या डाक में शार्क का पंख, समुद्री घोड़ा या समुद्री कर्कटी छिपाकर भेजा जा रहा है, तो एल्गॉरिद्म इसकी जानकारी ऑपरेटर को दे सकेगा, जो उस वस्तु की गहन जांच करेंगे।
नमूनों के कुल 298 स्कैन पर आधारित हमारे प्रशिक्षण एल्गॉरिद्म की सफलता दर शार्क के पंखों, समुद्री घोड़ों और समुद्री कर्कटी के मामले में क्रमशः 95 फीसदी, 95 फीसदी और 85 फीसदी थी।
इंसानों की जरूरत खत्म नहीं होती
-कंप्यूटर एल्गॉरिद्म पर आधारित प्रौद्योगिकी भले ही सामान या डाक की जांच में मदद कर सकती है, लेकिन इसकी नजरों में आई जानकारी को सत्यापित करने के लिए इंसानों की जरूरत होती है। दरअसल, कभी-कभी एल्गॉरिद्म गलत जानकारी दे सकते हैं। कुछ वस्तुओं को पहचानने में उनसे चूक हो सकती है।
इसके बावजूद, समुद्री जीवों की तस्करी का पता लगाने में एआई को सहायक के रूप में इस्तेमाल करने से प्रमुख व्यापार मार्गों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिससे ऐसी गतिविधियों पर लगाम लगाना संभव हो सकेगा। अग्रिम मोर्चों पर इन एल्गॉरिद्म की तैनाती के उपाय करना अगला कदम होगा।
(द कन्वरसेशन) पारुल दिलीप
दिलीप
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