पोलो ग्राउंड बेदखली नोटिस: निचली अदालत को भारतीय पोलो संघ की याचिका पर फैसला करने का निर्देश
नरेश
- 08 Jun 2026, 08:40 PM
- Updated: 08:40 PM
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक जिला अदालत को भारतीय पोलो संघ की उस याचिका पर फैसला करने को कहा, जिसमें रेस कोर्स इलाके में स्थित 15.20 एकड़ क्षेत्रफल वाले जयपुर पोलो ग्राउंड से उसे बेदखल करने के सरकारी नोटिस पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की अवकाशकालीन पीठ ने दोनों पक्षों को 10 जून को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया।
भारतीय पोलो संघ के वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि याचिका लंबित रहने के दौरान अधिकारियों को उन्हें बेदखल करने से रोकने का आदेश पारित किया जाए, वहीं केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने दलील दी कि शुक्रवार तक नोटिस क्रियान्वित किये जाने की संभावना नहीं है।
बेदखली का कारण पूछे जाने पर, केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि पोलो ग्राउंड के कब्जे वाली भूमि, साथ ही दिल्ली जिमखाना क्लब सहित आसपास के अन्य प्रतिष्ठानों की भूमि को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है।
अदालत ने ऐसी संपत्तियों में स्थित विरासत संरचनाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की और बढ़ते प्रदूषण के बीच राष्ट्रीय राजधानी में ऊंची इमारतों के निर्माण पर खेद व्यक्त किया।
न्यायमूर्ति कृष्णा ने कहा, ''दिल्ली का दम घुट जाएगा। एनडीएमसी (नयी दिल्ली नगरपालिका) क्षेत्र में स्वच्छ हवा में सांस लेने की जो थोड़ी-बहुत जगह बची है, वह भी छिन जाएगी। हमारा दम घुट जाएगा।''
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार ने 200 वर्षों में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता महसूस नहीं की और पूछा कि क्या ऊंची इमारतें बनाना जनहित में है।
उच्च न्यायालय ने सवाल किया, ''आप दिल्ली को क्या बनाना चाहते हैं? दिल्ली के लोग छोटे-मोटे पहाड़ पर जाते हैं और बस जाते हैं। यह हमारे लिए फेफड़े के समान है और आप इसे भी छीनना चाहते हैं। सुनिश्चित करें कि लोग दिल्ली आना बंद कर दें। चारों ओर सिर्फ ऊंची इमारतें ही बची हैं। दो मंजिला इमारतें तोड़ी जा चुकी हैं। हर कॉलोनी ध्वस्त कर दी गई है। अगर आप चाहते हैं कि दिल्ली ऐसे ही रहे, तो भगवान ही मालिक है।''
अदालत ने कहा, ''आपके (सरकार के) पास शक्ति है। लेकिन बात यह है कि दिल्ली में लोगों का दम घुट जाएगा।''
केंद्र सरकार के वकील ने दलील दी कि राजधानी में सीमित जगह है और सरकार को अपने लिए भूमि की आवश्यकता है।
भारतीय पोलो संघ ने अपनी याचिका में कहा है कि उसने जयपुर पोलो ग्राउंड के लिए 'एस्टेट ऑफिसर' के 20 मई के बेदखली आदेश के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटियाला हाउस अदालत के समक्ष अपील दायर की है, साथ ही सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जेदारों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत अंतरिम रोक का अनुरोध करते हुए एक अर्जी भी दायर की है।''
याचिका में कहा गया है कि हालांकि 4 जून को जबरन बेदखली की जाने वाली थी लेकिन 3 जून को जिला न्यायाधीश द्वारा न तो अपील और न ही बेदखली आदेश पर रोक लगाने के अनुरोध पर विचार किया गया। इसमें कहा गया है कि नोटिस जारी करने के बाद मामले को 23 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
भाषा सुभाष नरेश
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