मप्र रास चुनाव : मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस ने 'सीट चोरी' करार दिया
ब्रजेन्द्र रवि कांत
- 10 Jun 2026, 12:34 AM
- Updated: 12:34 AM
भोपाल, नौ जून (भाषा) मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।
कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है।
पार्टी इस मुद्दे को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी या सीधे उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी, इस बारे में उसके नेताओं ने कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता और पार्टी के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने सुझाव दिया कि यह ऐसा मामला है जिसे सीधे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जानी चाहिए।
इस बीच, कांग्रेस ने भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग के बाहर धरना आरंभ कर दिया है। उधर, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता देश की राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय पहुंच गए और अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने पर मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए।
राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने जारी एक आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फार्म 26 में 'उक्त न्यायालय परिवाद का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है'।
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।
नटराजन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जब सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं थी और भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतार दिया तभी यह स्पष्ट हो गया था कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान को 'कुचलने' के प्रयास में है।
नटराजन ने कहा, ''अभी तक तो मामला वोट चोरी तक सीमित था, अब यह सीट चोरी हो गया है... जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायक एकजुट हैं तो उन्होंने उस कानूनी नोटिस की आड़ ली जिसे संज्ञान में ही नहीं लिया गया।''
नटराजन ने कहा कि यह महज एक उम्मीदवारी के बारे में नहीं है, देश में एक गंभीर स्थिति है।
उन्होंने कहा, ''हम इसे चुनौती देंगे।''
भाजपा प्रत्याशी केवट ने इसे 'सच्चाई की जीत' बताया और कहा कि जो सच था वह स्पष्ट रूप से जीत गया है।
केवट ने कहा, ''जिन्होंने सच छिपाया वे हार गए हैं...''।
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "हमें जो कागज (जानकारी) मिले वो किसने दिए...कांग्रेस की क्या स्थिति है, आप समझ सकते हैं। मतलब हमारे पास तेलंगाना से जानकारी आ रही है।"
विजयवर्गीय ने कहा, "तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है। हमारे पास तो कोई जानकारी थी नहीं। हमें तो कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी होगी। कांग्रेस भले ही विधायकों को बेंगलुरु ले जाए या लंदन जाएं, चुनाव हम जीतते क्योंकि देश की जनता को मोदी जी पर विश्वास है।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने नटराजन के नामांकन को निरस्त किए जाने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है।
राज्यसभा सदस्य तन्खा ने कहा कि उन्होंने स्वयं नामांकन पत्रों की जांच की है और उसमें ऐसी कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई थी, जिसे घोषित किया जाना आवश्यक हो।
उन्होंने कहा, ''उनके (नटराजन) खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं थी। केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 223 के तहत एक नोटिस था, जिसमें एक आवेदक ने दावा किया था कि उन्हें और अन्य लोगों को 10 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने उस नोटिस पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि यह नोटिस उन्हें भेजा ही नहीं जा सकता, क्योंकि उनका उस मामले से कोई संबंध नहीं है।''
तन्खा ने कहा, ''न कोई अपराध दर्ज था, न कोई प्राथमिकी थी और न ही कोई विधिक प्रकरण लंबित था। ऐसे में वे आखिर कौन-सी बात प्राथमिकी या न्यायिक प्रकरण के रूप में घोषित किया गया, केवल किसी अदालत द्वारा नोटिस जारी कर देना अपने आप में कोई मामला या अपराध सिद्ध नहीं करता।''
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बिना किसी विधिक प्रकरण के एक ऐसी असामान्य स्थिति बना दी गई, जिसके आधार पर भोपाल के निर्वाचन अधिकारी ने एक राष्ट्रीय पार्टी के विजयी उम्मीदवार को पराजित कर दिया।
उन्होंने कहा, ''यह अत्यंत दुखद है। यह लोकतंत्र की हत्या है।''
तन्खा ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में पार्टी को सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''इस पूरे मामले को बेनकाब करना चाहिए और जिम्मेदार लोगों को उजागर करना चाहिए। यदि लोकतंत्र में इस प्रकार नामांकन पत्रों को निरस्त करने का सिलसिला शुरू हो गया, तो इस देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। यह लोकतंत्र के अंत की शुरुआत होगी।''
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार ने आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी छिपाई और अब कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को चुनाव होना है। सोमवार को नामांकन की आखिरी तारीख थी जबकि आज नामांकन पत्रों की जांच की गई।
भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया।
गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है।
निर्वाचन अधिकारी का यह फैसला ऐसे दिन आया जब 'क्रॉस वोटिंग' से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया था जबकि दूसरे जत्थे को मंगलवार शाम को बेंगलुरु के लिए रवाना होना था।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई जिन तीन सीट पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत लगभग तय है जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी था।
भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत
1006 0034 भोपाल