शुभेंदु ने टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में वापस लाने का संकल्प जताया
संतोष
- 12 Jun 2026, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
कोलकाता, 12 जून (भाषा) सिंगूर आंदोलन से पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलाव के करीब दो दशक बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को टाटा समूह को राज्य में वापस लाने का संकल्प लिया।
शुभेंदु ने राज्य की पिछली वाम मोर्चा एवं तृणमूल कांग्रेस सरकारों पर उनकी औद्योगिक नीतियों को लेकर निशाना साधा।
शुभेंदु ने वाम मोर्चा पर जबरन भूमि अधिग्रहण करने और तृणमूल सरकार पर ''फोटो-सेशन वाला औद्योगीकरण'' करने का आरोप लगाया।
शुभेंदु ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी सरकार ऐसा मध्यम मार्ग अपनाएगी, जिसमें किसानों के हितों की रक्षा हो और निवेश भी आकर्षित किया जा सके।
उन्होंने कहा, ''हम टाटा समूह को पश्चिम बंगाल वापस लाएंगे।''
उनकी इस टिप्पणी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक पुराने और संवेदनशील मुद्दे को फिर से सामने ला दिया।
हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना एक ऐसे राजनीतिक आंदोलन का केंद्र बनी थी जिसने राज्य की चुनावी राजनीति की दिशा बदल दी थी। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन ने ममता बनर्जी को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया और इसी के साथ वाम मोर्चा के 34 साल के शासन का 2011 में अंत हुआ था।
शुभेंदु ने शुक्रवार को इसी राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारें तो बदलती रहीं लेकिन पश्चिम बंगाल को औद्योगिक अवसर गंवाने की कीमत चुकानी पड़ी।
उन्होंने कहा, ''हम पिछली सरकार की तरह झूठ बोलकर और 'फोटो सेशन' आयोजित करके उद्योगों को आकर्षित करने का दिखावा नहीं करना चाहते।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक ढांचे पर काम कर रही है लेकिन औद्योगीकरण लोगों की सहमति के बिना नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, ''हम उस जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हैं, जैसा पूर्ववर्ती वाम मोर्चा शासन के दौरान सिंगूर और नंदीग्राम में हुआ था। साथ ही, हम तृणमूल कांग्रेस की उस नीति के भी खिलाफ हैं, जिसमें उद्योग लाने के नाम पर केवल फोटो खिंचवाए गए, झूठ फैलाया गया और हकीकत में कुछ नहीं किया गया।''
शुभेंदु ने पश्चिम बंगाल में लगभग दो दशकों से उद्योगों पर चल रही बहस में दो परस्पर विरोधी राजनीतिक विमर्शों के बीच भाजपा सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि विकास और जनता की स्वीकार्यता का साथ-साथ चलना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''लोगों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जबरन भूमि अधिग्रहण का विरोध किया। लोगों ने तृणमूल सरकार के उस रवैये का भी विरोध किया, जिसमें उद्योगों से कहा गया कि वे पश्चिम बंगाल छोड़ दें, क्योंकि प्रशासन भूमि अधिग्रहण नहीं करेगा। हमारा मानना है कि उद्योग टकराव के बिना और सभी हितधारकों को साथ लेकर लाए जा सकते हैं।''
शुभेंदु ने टाटा समूह को राज्य में वापस लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए यह स्पष्ट नहीं किया कि भविष्य में टाटा समूह का कोई निवेश सिंगूर से जुड़ सकता है या नहीं।
उन्होंने कहा कि मूल कारखाने की जमीन अब सरकार के नियंत्रण में नहीं है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद इसे किसानों को लौटा दिया गया था।
उन्होंने कहा, ''जमीन की प्रकृति बदल गई है। लोहे की छड़ें, सीमेंट और औद्योगिक सामग्री अब भी मिट्टी में दबी हुई हैं। हमारे पास कई परियोजनाओं के प्रस्ताव पहले ही आ चुके हैं और मैंने उनकी समीक्षा के लिए उद्योग सचिव के नेतृत्व में एक टीम गठित की है।''
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक विमर्शों में सिंगूर की जमीन का मुद्दा लगातार अलग-अलग तरह की राय और बहस को जन्म देता रहा है।
जहां यह आंदोलन जबरन अधिग्रहण के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बना, वहीं बाद में कई स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि जमीन के कुछ हिस्से न तो पूरी तरह खेती योग्य बनाए गए और न ही वहां उद्योग विकसित हुआ।
वाम मोर्चा और तृणमूल की पूर्ववर्ती सरकारों के आलोचक सिंगूर को वर्षों से ऐसी जगह बताते रहे हैं जहां पश्चिम बंगाल ने एक कारखाना भी खोया और कीमती समय भी।
शुभेंदु ने इस महीने के अंत में पेश किए जाने वाले अपनी सरकार के पहले बजट में बड़ी नीतिगत घोषणाओं के भी संकेत दिए।
उन्होंने कहा, ''बजट से यह स्पष्ट होगा कि हम पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। हमारा ध्यान रोजगार सृजन, आर्थिक पुनरुद्धार और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने पर है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 125 दिन की रोजगार योजना जल्द ही शुरू करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि औद्योगिक विकास सरकार की आर्थिक रणनीति का प्रमुख स्तंभ होगा।
शुभेंदु ने ममता बनर्जी की पूर्व सरकार के दौरान हर साल आयोजित होने वाले प्रमुख निवेश सम्मेलन 'बंगाल वैश्विक व्यापार सम्मेलन' (बीजीबीएस) पर हुए खर्च की जांच की घोषणा की।
उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि सम्मेलन के लगातार आयोजनों के लिए एक 'इवेंट मैनेजमेंट' कंपनी को 635 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
उन्होंने कहा, ''जांच कराई जाएगी। जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।''
पिछली सरकार बीजीबीएस को पश्चिम बंगाल की निवेश क्षमता के प्रमाण के रूप में पेश करती रही थी हालांकि विपक्षी दल अक्सर यह सवाल उठाते रहे कि निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदले या नहीं।
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष
1206 1723 कोलकाता