शुभेंदु ने दुर्गा पूजा समितियों को सिर्फ जरूरत के आधार पर सरकारी मदद का संकेत दिया
नरेश
- 12 Jun 2026, 05:28 PM
- Updated: 05:28 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 12 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई दुर्गा पूजा अनुदान व्यवस्था जारी रह सकती है, लेकिन यह राशि सिर्फ उन्हीं आयोजकों को मिलेगी, जिन्हें सचमुच आर्थिक मदद की जरूरत है।
शुभेंदु की इस टिप्पणी से राज्य में सियासी चर्चा के केंद्र में रही दुर्गा पूजा अनुदान नीति में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस साल के अनुदान के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पिछली सरकार की उस प्रथा को शायद ही अपनाएगी, जिसके तहत सभी पूजा समितियों को उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना एक जैसी वित्तीय मदद दी जाती थी।
शुभेंदु ने कहा, "जिन समितियों को सरकारी मदद की जरूरत नहीं है, उन्हें अनुदान दिए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार उन समितियों के साथ खड़ी रहेगी, जो आर्थिक मदद के बिना दुर्गा पूजा का आयोजन नहीं कर सकते।"
पूर्ववर्ती ममता सरकार में 2018 में शुरू की गई दुर्गा पूजा अनुदान योजना के तहत हर समिति को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। बाद के वर्षों में अनुदान राशि में लगातार वृद्धि की गई और पिछले साल यह बढ़कर 1.10 लाख रुपये प्रति समिति हो गई। ममता सरकार ने दुर्गा पूजा आयोजकों को बिजली के बिल पर 80 फीसदी की छूट भी दी थी।
पिछले साल लगभग 44,000 समितियों को मदद मिलने के साथ यह योजना एक बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता और महत्वपूर्ण राजनीतिक पहुंच कार्यक्रम बन गई थी।
आलोचकों ने अक्सर सवाल उठाया कि कोलकाता की कुछ सबसे बड़ी पूजा समितियों को-जिनका बजट कई करोड़ रुपये का होता है और जिन्हें बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट स्पॉन्सरशिप मिलती है-वही सरकारी मदद क्यों मिलनी चाहिए, जो स्थानीय लोगों के चंदे पर निर्भर छोटी मोहल्ला समितियों को हासिल होती है।
शुभेंदु ने कहा, "जो लोग उस आर्थिक मदद के आधार पर पूजा का आयोजन करते हैं, उन्हें सहायता मिलेगी। लेकिन जिन्हें इसकी जरूरत नहीं है, उन्हें यह राशि दिए जाने की आवश्यकता नहीं है।"
हालांकि, उन्होंने नीति में तत्काल किसी बदलाव की घोषणा से परहेज किया और इस बात पर जोर दिया कि सरकार के भीतर मामले पर अभी औपचारिक रूप से चर्चा होनी बाकी है।
शुभेंदु ने कहा, "हमने अभी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू नहीं की है। सूचना और सांस्कृतिक मामलों का विभाग मेरे पास है। इसमें एक राज्य मंत्री भी हैं। हम निश्चित रूप से इस मामले पर चर्चा करेंगे।"
यह मुद्दा पश्चिम बंगाल में सियासी अहमियत रखता है, क्योंकि दुर्गा पूजा न केवल राज्य का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पर्व है, बल्कि राजनीतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र भी है।
भाषा पारुल नरेश
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