कर्नाटक में आरएसएस के पंजीकरण की मांग 'राजनीति' : मोहन भागवत
प्रशांत
- 15 Jun 2026, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
(फाइल फोटो के साथ)
त्रिशूर, 16 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के पंजीकरण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि संगठन के पास न तो कुछ छिपाने के लिए है और न ही वह जनता की नजरों से बचकर काम करता है।
भागवत रविवार को केरल के त्रिशूर में आरएसएस के शताब्दी संपर्क कार्यक्रम के तहत एक सभा को संबोधित करने के बाद सवालों का जवाब दे रहे थे।
यह पूछे जाने पर कि कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस से अपना पंजीकरण कराने की मांग की है, भागवत ने कहा कि संगठन के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह खुले तौर पर अपनी गतिविधियां संचालित करता है।
संघ प्रमुख ने कहा, "बहुत-सी अपंजीकृत चीजें संचालित हो रही हैं और हम कोई बात छिपाते नहीं हैं। हम खुलेआम काम करते हैं। हम लोगों को बुलाते हैं और उन्हें बताते हैं कि हम क्या करते हैं।"
उन्होंने आरएसएस के पंजीकरण की मांग को "राजनीति" करार देते हुए कहा कि संगठन के लिए ऐसी कोशिशें कोई नयी बात नहीं हैं।
भागवत ने कहा, "यह राजनीति है। इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं... हमें इसकी आदत हो गई है। संघ के अस्तित्व में आने के 10-15 साल बाद ही हमें इन सब चीजों का सामना करना पड़ा था। अगर ऐसा न हो, तो हमें लगता है कि कुछ गड़बड़ है।"
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित यह संगठन सार्वजनिक बहस और आम सहमति की प्रक्रिया से उभरकर सामने आया।
भागवत ने कहा, "हिंदू धर्म पंजीकृत नहीं है। कई चीजें पंजीकृत नहीं होतीं। जो लोग सरकार से निधि चाहते हैं, उन्हें पंजीकरण कराने की जरूरत होती है। ऐसा तो होना ही चाहिए। लेकिन सरकार जानती है कि संघ का अस्तित्व है।"
संघ प्रमुख ने कहा कि अतीत में आरएसएस पर दो बार प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इन कार्रवाइयों से ही पता चलता है कि अधिकारियों को संगठन के अस्तित्व और पहचान के बारे में अच्छी तरह से जानकारी थी।
भागवत ने कहा, "सरकार ने हम पर दो बार प्रतिबंध लगाया। एक प्रतिबंध अदालत के आदेश के तहत और दूसरा सत्याग्रह के बाद हटाया गया। इसका मतलब है कि सरकार को आरएसएस के अस्तित्व के बारे में पता था।"
उन्होंने कहा कि संगठन ने 1950 में सरकार को अपना लिखित संविधान सौंपा था और किसी भी अधिकारी ने कभी इस बात पर जोर नहीं दिया कि मान्यता मिलने से पहले उसके लिए पंजीकरण कराना जरूरी है।
भागवत ने कहा, "पिछले 100 वर्षों में किसी ने हमसे नहीं कहा कि हमें पंजीकरण कराना होगा।"
आरएसएस प्रमुख ने आरोप लगाया कि ऐसी मांगों का मकसद आरएसएस के काम में बाधा डालना और लोगों के मन में संदेह पैदा करना है।
उन्होंने कहा, "वे किसी न किसी तरह एक तरफ तो संघ के काम में बाधा डालना चाहते हैं और दूसरी तरफ लोगों के मन में शक पैदा करना चाहते हैं। लेकिन अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि लोग हमें जानते हैं।"
भागवत ने कहा, "हमारे कार्यकर्ता हर इलाके में रहते हैं। लोग उन्हें रोज देखते हैं। हमारी शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं। हम सार्वजनिक कार्यक्रम करते हैं और हमारी पहुंच बहुत व्यापक है। अगर हम चीजें छिपाकर रखते, तो यह सब मुमकिन नहीं होता।"
प्रियंक खरगे ने आरएसएस से मांग की है कि वह संगठन का पंजीकरण कराए, अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे और वित्त पोषण, आय, खर्च एवं संपत्ति के स्रोतों का खुलासा करे।
भाषा पारुल प्रशांत
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