स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया
शोभना
- 16 Jun 2026, 10:57 AM
- Updated: 10:57 AM
ब्रातिस्लावा, 16 जून (भाषा) स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार किए जाने और इसमें भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच सोमवार को हुई बातचीत के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए ताकि वे अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और मौजूदा भूराजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप बन सकें।
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक, ''इस संदर्भ में भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार व विस्तार और उसमें भारत को स्थायी सदस्य बनाने संबंधी स्लोवाकिया के लगातार समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।''
प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री फिको ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न वैश्विक मंचों पर आपसी समन्वय के साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है।
भारत का तर्क है कि वर्तमान में 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की संरचना पुरानी हो चुकी है और यह मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों तथा बदलती अंतरराष्ट्रीय वास्तविकताओं का पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करती।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने की भारत की मांग को दुनिया के अनेक देशों का समर्थन मिल रहा है।
यूरोप के कई देशों ने भी भारत का समर्थन किया है।
इसके अलावा जी4 समूह के अन्य तीन देश-ब्राजील, जर्मनी और जापान भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं, जिनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं।
इनके अलावा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य भी होते हैं, जिन्हें दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
स्लोवाकिया ने भारत की परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के प्रति भी अपने समर्थन को दोहराया।
एनएसजी 48 देशों का एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण समूह है, जिसका उद्देश्य परमाणु सामग्री और प्रौद्योगिकी के सुरक्षित व जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा वर्ष 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला राजकीय दौरा है।
इस अवसर पर भारत और स्लोवाकिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए उन्हें 'व्यापक साझेदारी' का दर्जा दिया।
दोनों देशों का उद्देश्य रणनीतिक, आर्थिक, प्रौद्योगिकी व सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा तथा व्यापक बनाना है।
प्रधानमंत्री मोदी यूरोप की अपनी सप्ताहभर की यात्रा के तहत ब्रातिस्लावा पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री मोदी और फिको ने आतंकवाद के सभी रूपों, विशेष रूप से सीमा-पार आतंकवाद की बिना किसी शर्त और स्पष्ट शब्दों में निंदा की।
दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले की भी कड़ी भर्त्सना की।
इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए भारत और स्लोवाकिया ने आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों ने साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा नामित आतंकवादियों और संगठनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों के सहयोगी, प्रायोजक, वित्तपोषक और समर्थक के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
दोनों नेताओं ने रक्षा के क्षेत्र में रक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, क्षमता विकास और रक्षा उद्योग से जुड़े सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर सहमति जताई।
उन्होंने रक्षा सहयोग संबंधी आशय-पत्र पर हस्ताक्षर होने का भी स्वागत किया, जिसे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत और स्लोवाकिया ने इसके अलावा महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा और साइबर अपराधों की रोकथाम व उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
दोनों पक्षों ने एक ऐसे डिजिटल वातावरण को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया, जो सुरक्षित, सभी के लिए सुलभ, स्थिर, परस्पर संगत और चुनौतियों के प्रति मजबूत हो।
इस वर्ष जनवरी में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हुई वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत करते हुए दोनों नेताओं ने इस समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर और इसके जल्द क्रियान्वयन का आह्वान किया।
दोनों देशों का मानना है कि इससे व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे तथा आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी।
भारत और स्लोवाकिया ने इस बात पर भी सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान और उन्हें प्रोत्साहित करने में भारत-स्लोवाकिया संयुक्त आर्थिक समिति की भूमिका को और मजबूत बनाया जाएगा।
इसके अलावा, दोनों देशों ने मौसम विज्ञान, जल विज्ञान, ऑटोमोबाइल विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की।
यह साझेदारी दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भाषा
जितेंद्र शोभना
शोभना
1606 1057 ब्रातिस्लावा