नीट से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध गैर-आनुपातिक और सतही समाधान : आईएफएफ
सुरेश
- 16 Jun 2026, 04:54 PM
- Updated: 04:54 PM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने मंगलवार को नीट-यूजी 2026 दोबारा आयोजित किये जाने से पहले टेलीग्राम पर पाबंदी लगाने और उसके संदेश संपादन की सुविधा बंद करने के सरकार के कदम की आलोचना की।
आईएफएफ ने इस कदम को एक 'कामचलाऊ व्यवस्था' तथा परीक्षा में धोखाधड़ी के मामले में 'गैर-अनुपातिक' कार्रवाई बताया है।
डिजिटल अधिकारों की वकालत करने वाले इस संगठन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी एक बयान में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में घोषित निर्देशों पर अपनी आपत्ति जताई।
आईएफएफ ने कहा, ''टेलीग्राम को बंद करना एक कामचलाऊ समाधान है और परीक्षा में धोखाधड़ी के मामले में यह ज़रूरत से ज़्यादा सख्त कदम है। एनटीए की सिफारिश पर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत, 22 जून 2026 तक पूरे भारत में टेलीग्राम तक पहुंच बाधित कर दी है और अलग से इस मंच को आदेश दिया है कि वह 30 जून 2026 तक हर भारतीय यूजर के लिए 'मैसेज-एडिटिंग' की सुविधा बंद कर दे।''
बयान में कहा गया, ''यह बड़े पैमाने पर चल रहे धोखाधड़ी के गिरोह से निपटने के लिए उठाया गया एक सख्त और देशव्यापी कदम है, और खुद सरकार ने भी माना है कि यह संविधान के अनुरूप नहीं है।''
आईएफएफ ने कहा कि आईटी अधिनियम की धारा-69ए और इसके तहत बने 2009 के 'ब्लॉकिंग' नियम सरकार को कंप्यूटर स्रोत पर मौजूद खास 'जानकारी' तक पहुंच रोकने की अनुमति देते हैं, लेकिन ये नियम किसी पूरे मंच को बंद करने या किसी कंपनी को पूरे देश के लिए अपने उत्पाद से कोई हिस्सा हटाकर उसे फिर से डिज़ाइन करने का आदेश देने तक लागू नहीं होते।
संगठन ने कहा, ''श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में, उच्चतम न्यायालय ने धारा 69ए को कायम रखा था, क्योंकि यह सीमित है और इसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इसका अभिप्राय यह निकालना कि यह लाखों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मंच को बंद करने की अनुमति देता है, खुद एनटीए के ही अनुसार, बहुत ज्यादा सख्त पाबंदी लगाने जैसा है।''
आईएफएफ ने संदेश संपादन संबंधी निर्देश के बारे में अपनी विज्ञप्ति में कहा कि ''इसके लिए कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है'' और अगर ऐसा कोई अधिकार क्षेत्र है, तो उसका आदेश में जिक्र होना चाहिए।
संगठन ने दलील दी कि सरकार के अपने विमर्श से संकेत मिलता है कि पाबंदी लगाने का कदम आनुपातिकता की संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरा।
आईएफएफ ने कहा कि ''यह आदेश खुद अपनी ही बात का खंडन करता है। 'न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017)' मामले में तय किए गए और 'अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020)' मामले में लागू किए गए ''आनुपातिकता के संवैधानिक परीक्षण'' के अनुसार टेलीग्राम तक पहुंच पर लगाई गई कोई भी प्रतिबंध ऐसा न्यूनतम दखल देने वाला उपाय होना चाहिए जो अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सके।''
आईएफएफ ने एनटीए की विज्ञप्ति का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी के अपने बयान से संकेत मिलता है कि उसने ''बड़ी संख्या में टेलीग्राम चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स को तुरंत हटाने'' का काम किया और इसी काम की वजह से ''इन गिरोह से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सका है।''
संगठन ने कहा, ''अगर चैनल के स्तर पर कार्रवाई करके नुकसान को रोका जा सकता था, तो पूरी तरह से ऐप्लिकेशन को बाधित करने की दलील कमजोर पड़ जाती है।'' उसने कहा कि सरकार ने एक 'अधिक कठोर तरीका' अपनाया है, जबकि वह खुद यह मान रही है कि एक कम सख़्त तरीका भी काम कर रहा था।
आईएफएफ ने अपने बयान में एनटीए की इस स्वीकारोक्ति का भी उल्लेख किया है कि इस पाबंदी से ''लाखों ऐसे नागरिक प्रभावित होंगे जो टेलीग्राम का इस्तेमाल वैध निजी, शैक्षणिक, पेशेवर और जानकारी से जुड़े कामों के लिए करते हैं''।
संगठन ने कहा, ''प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक इससे जुड़ा अतिरिक्त क्षति भी रिकॉर्ड पर दर्ज है।''
बयान में एनटीए के उस बयान का भी जिक्र किया गया जिसमें उसने माना है कि ''सुरक्षित परीक्षा प्रक्रिया के दायरे से बाहर ऐसा कोई प्रश्न पत्र उपलब्ध नहीं है'' और ''की गई कार्रवाई से परीक्षा की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है।''
संगठन ने कहा कि यदि परीक्षा सुरक्षित है और कोई लीक नहीं हुई है, तो जिसे दबाया जा रहा है वह अफवाह है, और अफवाह किसी मंच को बंद करने को औचित्य नहीं ठहरा सकती, जबकि विशिष्ट अवरोध और आपराधिक अभियोजन के विकल्प मौजूद हैं।
संगठन ने कहा कि यह रोक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दोबारा आयोजित की जा रही राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी के आखिरी दिनों में लगाई गई, जब हज़ारों छात्र अध्ययन समूह, संशय का समाधान और नोट आदि साझा करने के लिए टेलीग्राम पर निर्भर हैं।
आईएफएफ ने कहा, ''टेलीग्राम को बाधित करना एक प्रतिक्रियावादी और बेअसर कदम है। इससे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की असल वजह को दूर करने के बजाय आम उपयोगकर्ता को ही सजा मिलेगी।''
इसमें कहा गया, ''यह गौर करना जरूरी है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की घटना व्यवस्था के भीतर से हुई, यानी अंदर के लोगों द्वारा और मुद्रण एवं प्रश्नपत्र पहुंचाने के दौरान हो सकती है, जबकि वितरण के लिए मंच सबसे आखिरी कड़ी होती है।''
बयान में कहा गया, ''इसलिए, टेलीग्राम को बंद करना बार-बार हो रही नाकामियों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश भर है, क्योंकि जब तक मीडिया का ध्यान टेलीग्राम पर लगी इस रोक की ओर रहेगा, तब तक ये नाकामियां जारी रहेंगी।''
आईएफएफ ने पारदर्शिता को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है।
संगठन ने कहा, ''अनुराधा भसीन मामले में आए फैसले के मुताबिक, पहुंच पर रोक लगाने वाले आदेशों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि अदालत में उनकी समीक्षा हो सके। यहां आदेश और उससे जुड़ी दलीलें सामने नहीं आई हैं, और हमें यह भी जानकारी नहीं है कि टेलीग्राम का पक्ष सुना भी गया या नहीं।''
आईएफएफ ने कहा कि ऐप्लिकेशन पर पाबंदी आमतौर पर आईएसपी स्तर के डीएनएस और आईपी फ़िल्टरिंग के ज़रिये लागू की जाती है और ये 'ज़रूरत से ज़्यादा व्यापक' होते हैं। इनमें कानूनी इस्तेमाल भी बाधित हो जाता है, जबकि इनसे बचना आसान होता है।
आईएफएफ ने दलील दी, ''परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करने वाला एक संगठित गिरोह कुछ ही मिनटों में 'वीपीएन' या 'मिरर' का इस्तेमाल शुरू कर देता है, जबकि आम उपयोगकर्ता को एक हफ्ते तक सेवा नहीं मिल पाएगी।''
आईएफएफ ने सरकार से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आईटी अधिनियम 69ए के तहत जारी आदेश और उसके पीछे की एनटीए की सिफारिश को सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि इन आदेशों के कारणों की जानकारी मिल सके।
नीट-यूजी 2026 की परीक्षा तीन मई को कराई गई थी, लेकिन प्रश्नपत्र के कथित तौर पर पहले ही लीक होने के बाद यह परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को इसे दोबारा आयोजित कराया जा रहा है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए करीब 21 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश
1606 1654 दिल्ली