संसदीय समिति ने परीक्षाओं में अनियमितताओं जारी रहने पर चिंता जताई, कार्य योजना की पैरवी की
पवनेश
- 16 Jun 2026, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद परीक्षा संबंधी अनियमितताएं जारी रहने पर चिंता जताई है और शिक्षा मंत्रालय से एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए समयबद्ध कार्य योजना की अनुशंसा की है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति ने मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित वर्ष 2025-26 की अनुदान मांगों पर अपनी 364वीं रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर कार्रवाई संबंधी 381वीं रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को सौंपी।
रिपोर्ट में कहा गया, ''समिति मंत्रालय द्वारा उठाए गए उन कदमों का संज्ञान लेती है, जिनमें उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (एचएलसीई) की सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में वाली समिति का गठन शामिल है।"
इसमें कहा गया, ''हालांकि, इन उपायों के बावजूद प्रश्नपत्र संबंधी अनियमितताएं अब भी हो रही हैं, जिसके कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ रही हैं और छात्रों में भारी चिंता उत्पन्न हो रही है।''
रिपोर्ट में कहा गया, ''समिति उच्च शिक्षा विभाग को एचएलसीई की सिफारिशों के क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना जल्द से जल्द प्रकाशित करने की भी सिफारिश करती है।''
शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में व्यापक सुधार लागू करने के उद्देश्य से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।
संसदीय समिति ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन से जुड़ी कई कंपनियों को किसी एक संगठन या राज्य सरकार ने भले ही काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया हो, लेकिन इससे उन्हें अन्य राज्यों या संस्थाओं से ठेके मिलने पर रोक नहीं लगती।
रिपोर्ट में कहा गया, ''इसलिए समिति अनुशंसा करती है कि उच्च शिक्षा विभाग प्रतिबंधित की गई कंपनियों की देशव्यापी सूची तैयार करे, ताकि इस संबंध में स्पष्टता लाई जा सके।''
इस पर कार्रवाई संबंधी अपने जवाब में उच्च शिक्षा विभाग ने कहा कि एनटीए के मुख्य काम, ''आउटसोर्स'' नहीं किए जाते हैं और इनमें प्रश्नपत्र तैयार करना तथा उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी शामिल है।
भाषा हक सुमित पवनेश
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