समाज में जाति एवं धर्म पर आधारित तनाव को दूर करना सामूहिक जिम्मेदारी: आरएसएस नेता
धीरज
- 16 Jun 2026, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता सुनील आंबेकर ने मंगलवार को दावा किया कि हिंदू-मुस्लिम मुद्दा संगठन की स्थापना से पहले से मौजूद था। उन्होंने कहा कि कहा कि अलग-अलग धर्मों के बीच तनाव और जातिगत बंटवारे के लिए किसी एक संगठन को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता तथा इनके समाधान के लिए समाज को सामूहिक कोशिश करनी होगी।
आरएसएस के राष्ट्रीय मीडिया और प्रचार प्रमुख आंबेकर संघ से जुड़े इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम मीडियाकर्मियों को उनके बेहतरीन काम के लिए 'देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान 2026' देने के लिए आयोजित किया गया था।
उन्होंने सवाल किया, "हर किसी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अगर देश में हिंदू-मुस्लिम समस्या है, तो ऐसा कैसे हो सकता है कि जो कुछ भी अच्छा हो, उसका श्रेय सबको मिले तथा जो कुछ भी बुरा हो, उसका दोष सिर्फ संघ पर मढ़ा जाए? ऐसा कैसे हो सकता है?''
आंबेकर ने कहा, ''हिंदू-मुस्लिम मुद्दा संघ के बनने से पहले भी मौजूद था। यह संघ और मुसलमानों के बीच की समस्या नहीं है, यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच की समस्या है। इसलिए, सभी को मिलकर इस बारे में सोचना चाहिए।"
उन्होंने कहा, ''इसी तरह, अगर देश में जाति से जुड़ी समस्याएं हैं, तो सभी को ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।''
आरएसएस नेता ने भी कहा कि जाति से जुड़े मुद्दों समेत सामाजिक चुनौतियों को केवल राजनीति के जरिए हल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनके लिए समाज के स्तर पर व्यापक नजरिए की जरूरत होती है।
उन्होंने रेखांकित किया कि अलग-अलग पंथों को शांति से साथ रहना चाहिए। आंबेकर ने कहा कि 'धर्म' को सिर्फ़ 'रिलीजन' के तौर पर नहीं, बल्कि साझे नियमों और जिम्मेदारियों के एक ढांचे के तौर पर समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''इसलिए, जब हम धर्म की बात करते हैं, तो हमारा अभिप्राय एक ऐसे ढांचे से होता है जिसमें एक पंथ दूसरे पंथ को खत्म करने या उससे टकराने की कोशिश नहीं करता। बल्कि, सभी 'रिलीजन' को एक साथ मिलकर रहना चाहिए। जैसे एक ही सड़क पर 10 या 50 कारें चल सकती हैं, वैसे ही अलग-अलग पंथ भी साथ-साथ रह सकते हैं। नए पंथ भी सामने आ सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे नए वाहन बन सकते हैं, और इसमें कोई समस्या नहीं है।''
भाषा
राजकुमार धीरज
धीरज
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