माकपा के जलील ने शराब कर में कटौती को लेकर आईयूएलएल पर निशाना साधा, मंत्री का पलटवार
अविनाश
- 21 Jun 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
तिरुवनंतपुरम, 21 जून (भाषा) कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर में कटौती करने के यूडीएफ सरकार के प्रस्ताव को लेकर विवाद रविवार को और गहरा गया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता के. टी. जलील ने इस मुद्दे पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को निशाने पर लिया, जबकि स्थानीय स्वशासन मंत्री के. एम. शाजी ने सत्तारूढ़ मोर्चे की आबकारी नीति का बचाव करते हुए पलटवार किया।
जलील ने फेसबुक पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट में बजट प्रस्ताव का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यूडीएफ सरकार ने कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर घटा दिया है, जिससे लोग ऐसे पेय का अधिक सेवन कर सकेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम चुनावों के दौरान कर्नाटक से यूडीएफ उम्मीदवारों तक कथित तौर पर पहुंचे करोड़ों रुपये के बदले में किया गया एहसान है।
जलील ने धार्मिक संगठनों और नेताओं पर भी कटाक्ष करते हुए दावा किया कि सामाजिक मुद्दों पर अक्सर मुखर रहने वाले इन संगठनों और नेताओं में से किसी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध नहीं किया है।
उन्होंने कहा, ''किसी भी धार्मिक संगठन या किसी भी धर्म गुरु ने इस मुद्दे पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।''
जलील ने आरोप लगाया कि धर्म गुरु अक्सर यूडीएफ के कथित गलत कार्यों और भ्रष्टाचार का बचाव तथा औचित्य साबित करने की होड़ में लगे रहते हैं।
फेसबुक पोस्ट में जलील ने आईयूएमएल के विधायकों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पार्टी के 22 विधायकों में से किसी ने भी विधानसभा में इस प्रस्ताव का विरोध क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा, ''यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है! यह चुप्पी मुस्लिम लीग के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी।''
जलील की फेसबुक पोस्ट के साथ आईयूएमएल के प्रमुख सैयद सादिक अली शिहाब थंगल की तस्वीर भी साझा की गई।
आईयूएमएल पर हमला जारी रखते हुए जलील ने अपने व्यंग्यात्मक पोस्ट में कहा, ''...अब समुदाय और राज्य को गर्व करने के लिए और क्या चाहिए? खुशियां मनाइए, अल्पसंख्यकों!''
शाजी ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूडीएफ की नीति का उद्देश्य राज्य में शराब की खपत कम करना है और उन्होंने शराब के प्रति आईयूएमएल के लंबे समय से चले आ रहे विरोधी रुख को दोहराया।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''हमारा स्पष्ट रुख है कि शराब का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। आईयूएमएल शराब के खिलाफ है। महात्मा गांधी की पार्टी कांग्रेस भी शराब के खिलाफ है। दोनों दल शराब के विरोधी हैं।''
हालांकि, उन्होंने पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार पर केरल में शराब की खपत बढ़ाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि उसके कार्यकाल में कितने शराब बिक्री केंद्र खोले गए थे।
यह विवाद यूडीएफ सरकार के पहले बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर में कटौती करने के प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ। विपक्षी माकपा ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह कदम शराब कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
आबकारी मंत्री एम. लिजू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने राज्य में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों को लाने का फैसला नहीं किया है और बजट में की गई घोषणा केवल कराधान से संबंधित है।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी बजट प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि सत्ता संभालने के बाद से यूडीएफ सरकार ने किसी नए बार को अनुमति नहीं दी है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति राज्य में शराब की खपत और उपलब्धता को धीरे-धीरे कम करने की है।
हालांकि, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने कर रियायत को ''बेहद संदिग्ध'' करार दिया और आरोप लगाया कि इसके पीछे शराब कंपनियों के व्यावसायिक हित हैं।
विजयन ने चेतावनी दी कि शराब को सस्ता बनाने से उसकी खपत बढ़ेगी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार शराब पर कर में राहत देने को तैयार है, लेकिन लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए इसी तरह की कोई रियायत क्यों नहीं दे रही है।
भाषा
राखी अविनाश
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