पश्चिम बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर होगा सरकारी अवकाश, 125 फुट ऊंची प्रतिमा भी बनेगी
दिलीप
- 22 Jun 2026, 03:30 PM
- Updated: 03:30 PM
कोलकाता, 22 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सरकारी अवकाश घोषित करने समेत उनकी स्मृति में कई कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।
यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दो दिन पहले 'पश्चिमबंग दिवस' समारोह के दौरान बंगाल के विभाजनकालीन इतिहास का उल्लेख करते हुए मुखर्जी को पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिए जाने के बाद की गई है।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार का पहला बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने सोमवार को कहा कि छह जुलाई को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सरकारी अवकाश रहेगा।
दासगुप्ता ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार मुखर्जी की 125 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित करेगी तथा उनकी विरासत को संरक्षित करने के लिए पुस्तकालय और शोध केंद्र की स्थापना हेतु 200 करोड़ रुपये आवंटित करेगी।
हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्ष और बाद में भारतीय जनसंघ के संस्थापक रहे मुखर्जी पश्चिम बंगाल में भाजपा की राजनीतिक एवं वैचारिक सोच के केंद्र में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
बजट में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक आधुनिक संग्रहालय-सह-सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
एक अन्य सांस्कृतिक पहल के तहत सरकार ने 'टैगोर सांस्कृतिक केंद्र' स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दासगुप्ता ने कहा कि कालीघाट, तारापीठ और कंकालितला सहित प्रमुख शक्तिपीठों के लिए एक विरासत आयोग का गठन किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य के प्रमुख तीर्थस्थलों के आसपास संपर्क व्यवस्था और पर्यटन अवसंरचना को बेहतर बनाने के लिए 'बंगाल शक्तिपीठ सर्किट' भी विकसित किया जाएगा।
अन्य घोषणाओं में वित्त मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कर्मियों को पेशेवर कर से छूट दी जाएगी।
सरकार ने पेशेवर कर का भुगतान नहीं करने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कारावास के प्रावधान को समाप्त कर केवल आर्थिक दंड का प्रावधान रखा जाएगा।
ये कदम भाजपा सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत वह शासन संबंधी पहलों को सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत विषयों के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। राज्य में इस वर्ष विधानसभा चुनावों में जीत के बाद से ऐसे विषय उसकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में प्रमुखता से शामिल रहे हैं।
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