होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी: डोभाल
सुरेश
- 23 Jun 2026, 09:08 PM
- Updated: 09:08 PM
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) भारत ने पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का मंगलवार को स्वागत किया तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और आवश्यक वस्तुओं एवं उवर्रकों की आपूर्ति शृंखला में रुकावटें खत्म होंगी।
डोभाल ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है।
डोभाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के एनएसए सर्गेई शोइगु, ईरान के सुरक्षा अधिकारी जी निजामीपुर और ब्रिक्स देशों के अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए।
ब्रिक्स देशों के एनएसए की बैठक में अपने प्रारंभिक संबोधन में डोभाल ने भूराजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक अवरोधों के प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स समूह को इन चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभानी चाहिए।
डोभाल ने कहा, ''अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का भारत स्वागत करता है। हमें आशा है कि यह काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी।''
उन्होंने कहा, ''होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना एक बहुत ही स्वागत योग्य घटनाक्रम है। इससे आपूर्ति शृंखलाओं में रुकावटें खत्म होंगी और उर्वरक एवं रसायन जैसे क्षेत्रों में कमी की समस्या का समाधान होगा।''
डोभाल ने अनेक वैश्विक चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ''हम बहुत उथल-पुथल भरे समय में बैठक कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबाव और ऐसे नवाचार का सामना कर रही है, जो स्थापित उद्योगों, व्यापार के मूलभूत सिद्धांतों और ग्राहकों के व्यवहार को बुनियादी तौर पर बदल देते हैं या पूरी तरह से बदल देते हैं।
उन्होंने कहा, ''न केवल खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि इन संघर्षों को सुलझाने या कम करने के लिए मौजूद साधन और संस्थागत तंत्र भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।''
उन्होंने कहा, ''बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है''। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की अहम भूमिका है।
नयी दिल्ली ने इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर इस सम्मेलन की मेजबानी की।
डोभाल ने कहा कि ब्रिक्स अपने सदस्य देशों का एक बहुत ही खास गठबंधन है, जो शांति, प्रगति, विकास और सहयोग में विश्वास रखता है।
ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। इसका 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ।
ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है, क्योंकि यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
डोभाल ने दुनिया के समक्ष मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा, ''हमें नये सुरक्षा खतरों और चुनौतियों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। गैर-पारंपरिक खतरों ने राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर लिया है और पारंपरिक प्रतिक्रियाओं को विफल करने वाली प्रणालियां विकसित कर ली हैं।''
ईरान के सुरक्षा अधिकारी निजामीपुर ने ''अमेरिका के हमले के पहले दिन'' ईरान के मिनाब शहर में एक स्कूल परिसर में मारे गए बच्चों का पोस्टर दिखाया और कहा कि उनके देश पर हुए हमलों में से कुछ हमले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित सैन्य अड्डों से किये गए थे।
उन्होंने कहा, ''पूरी दुनिया ने देखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आक्रामकता और संकट की शुरुआत अमेरिका और यहूदी शासन (इजराइल) ने की थी। इनमें से कुछ हमले यूएई स्थित सैन्य अड्डों से किये गए थे।''
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद, यूएई ने सीधे तौर पर इस आक्रामकता में हिस्सा लिया और अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, स्कूलों और अस्पतालों पर हमले के लिए करने दिया।
भाषा सुभाष सुरेश
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