ईडी की राजेश एक्सपोर्ट्स के ठिकानों पर छापेमारी, कई लेनदेन पर हैं सवाल
अविनाश
- 23 Jun 2026, 09:16 PM
- Updated: 09:16 PM
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को सोना को परिष्कृत करने और आभूषण बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के कई ठिकानों की तलाशी ली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सेबी द्वारा कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप लगाए जाने के बाद संघीय एजेंसी ने अपनी जांच तेज कर दी है।
केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु स्थित मुख्यालय से संचालित कंपनी से जुड़े नौ ठिकानों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा)के तहत तलाशी ली गई। उन्होंने बताया कि ये ठिकाने बेंगलुरु और मुंबई में हैं।
ईडी की कार्रवाई पर कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
हाल ही में 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में राजेश एक्सपोर्ट्स के संस्थापक और चेयरमैन राजेश मेहता ने धन के गलत इस्तेमाल या किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि कंपनी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश पर होने वाले नए फॉरेंसिक ऑडिट में पूरा सहयोग करेगी और उसके खिलाफ बाजार नियामक की ओर से जारी अंतरिम आदेश को चुनौती नहीं देगी।
अधिकारियों ने बताया कि ईडी फेमा के संभावित उल्लंघन की जांच कर रही है। इसमें बेनामीदारों (वह व्यक्ति या संस्था जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति हस्तांरित की जाती है) के जरिए राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल)के शेयरों के लेनदेन के आरोप भी शामिल हैं।
ईडी के अधिकारियों का आरोप है कि दो करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की रकम देश से बाहर भेजी गई और कंपनी के बही-खाते में दर्ज स्वर्ण भंडार में 40 प्रतिशत की विसंगति पाई गई।
ईडी ने कहा कि वह इस आरोप की जांच कर रही है कि क्या लगभग 3,000 करोड़ रुपये की व्यापार प्राप्तियों को 'फर्जी' आयात के बदले समायोजित किया गया था, जिसकी आपूर्ति 'संदिग्ध' थी।
ईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने अफ्रीका में सोने की खदानों में कथित तौर पर 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया था, क्योंकि यह निवेश उसकी किसी भी आनुषंगी कंपनी के बही-खाते में 'नहीं दिखाया गया' था।
केंद्रीय एजेंसी इस आरोप की भी जांच कर रही है कि 'संदिग्ध' साख वाली 4-5 विदेशी कंपनियों के साथ लगभग 3,000 करोड़ रुपये की व्यापार प्राप्तियां और देय राशि का समायोजन किया गया।
राजेश एक्सपोर्ट्स के लिए मुश्किलें तब शुरू हुईं जब हाल ही में सेबी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 2020-21 से 2024-25 के दौरान अपने समेकित राजस्व को 15.15 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था।
सेबी ने तीन जून को जारी एक अंतरिम आदेश में कहा, ''राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर आरोप है कि उसने पांच वर्षों में अपने समेकित राजस्व को 15 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। कंपनी ने यह आय मुख्य रूप से अपनी विदेशी अनुषंगियों, विशेषकर स्विट्जरलैंड स्थित वैलकैम्बी एसए से दिखाई, जबकि उस अनुषंगी के वित्तीय लेखापरीक्षण रिपोर्ट में राशि बहुत कम दिखाई गई थी।''
बाजार नियामक ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को गलत तरीके से पेश किए जाने पर गंभीर चिंता जताई। उसने कहा कि आरईएल द्वारा बताई गई लगभग पूरी कमाई विदेशी आनुषंगी कंपनियों से हुई, जिनके वित्तीय लेखाजोखा को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सेबी ने आरईएल को जांच करने वाली प्राधिकारियों के साथ सहयोग करने, 30 दिनों के अंदर जरूरी दस्तावेज और स्पष्टीकरण जमा करने और सही जानकारी देने का निर्देश दिया। साथ ही, सेबी ने मेहता को अगली कार्यवाही पूरी होने तक कंपनी की प्रतिभूति को खरीदने, बेचने या उनमें लेन-देन करने से भी रोक दिया।
मेहता ने राजस्व के आंकड़ों में किसी भी तरह की हेराफेरी से इनकार किया था। उन्होंने कहा कि कंपनी ने सेबी को पहले ही 300-400 गीगाबाइट के दस्तावेज़ सौंप दिए थे, लेकिन उन्हें लगता है कि नियामक सही फाइलें नहीं ढूंढ पाया।
मेहता ने कहा कि मामले को सुलझाने के लिए वे मांगे गए सभी दस्तावेज़ दोबारा जमा करेंगे।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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