पेपर प्लेट फैक्ट्री में बंधुआ मजदूर प्रकरण: यातना से एक श्रमिक की मौत, शव बैग में भरकर फेंकने का आरोप
रंजन
- 25 Jun 2026, 04:45 PM
- Updated: 04:45 PM
मुजफ्फरनगर (उप्र), 25 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की एक पेपर प्लेट निर्माण इकाई से 12 बंधुआ मजदूरों को छुड़ाने के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है, जांचकर्ताओं ने पाया कि कैद किए गए श्रमिकों में से एक की कथित तौर पर यातना के कारण मौत हो गई और उसके शव को बाद में एक बैग में भरकर फेंक दिया गया था । पुलिस ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार ने बृहस्पतिवार को बताया कि यह तथ्य उस मामले की जांच के दौरान सामने आया, जो इस सप्ताह की शुरुआत में तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री पर छापेमारी के बाद उजागर हुआ था।
एसएसपी के मुताबिक, मृत श्रमिक की पहचान अर्जुन के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि अर्जुन की कथित तौर पर नवंबर 2025 में फैक्ट्री परिसर में यातना दिए जाने के बाद मौत हो गई थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मौत के बाद उसके शव को एक बैग में पैक कर फेंक दिया गया था।
कुमार ने बताया कि इस खुलासे के बाद फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी और फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान अब भी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमों का गठन किया गया है।
मामले की गहन जांच और साक्ष्य जुटाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया गया है। एसएसपी ने कहा कि टीम पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।
इस बीच, फैक्ट्री से मुक्त कराए गए सभी 12 मजदूरों का चिकित्सीय परीक्षण कराया जा चुका है और उनका उपचार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि पीड़ितों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर उनके बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं।
जिला प्रशासन श्रम विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर सरकारी योजनाओं के तहत मुक्त कराए गए श्रमिकों के पुनर्वास की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। प्रशासन उनके बैंक खाते खुलवाने तथा उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के प्रयास भी कर रहा है।
सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने पीटीआई को बताया कि बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए प्रत्येक श्रमिक को पुनर्वास योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक चार श्रमिक अपने परिजनों के पास पहुंच चुके हैं जबकि शेष श्रमिकों के उनके परिवारों और रिश्तेदारों से मिलाने का प्रयास जारी हैं।
यह मामला 22 जून को सामने आया था, जब प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण इकाई पर छापा मारकर नाबालिगों सहित 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था।
जांच में पता चला था कि मजदूरों को विभिन्न राज्यों से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर लाया गया था। हालांकि, उन्हें न तो मजदूरी दी गई और न ही फैक्ट्री परिसर से बाहर जाने की अनुमति थी। आरोप है कि उन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक फैक्ट्री के भीतर कैद रखकर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया गया।
बचाए गए कई श्रमिकों के शरीर पर चोटों और कथित यातना के निशान पाए गए थे। मजदूरों ने जांच अधिकारियों को बताया कि फैक्ट्री छोड़ने की कोशिश करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी।
श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पीटा गया, भाले से वार किया गया, कोड़े लगाए गए, कुत्तों से कटवाया गया और यहां तक कि जानवरों का चारा खाने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस ने इससे पहले फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम तथा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
पुलिस ने प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि अंकित बालियान फरार हो गया था, जिसकी तलाश जारी है।
भाषा सं जफर रंजन
रंजन
2506 1645 मुजफ्फरनगर