कर्नाटक, आंध्र और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने नदी जल विवादों का हल तलाशने का संकल्प लिया
धीरज
- 25 Jun 2026, 06:33 PM
- Updated: 06:33 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोप्पल, 25 जून (भाषा) कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने बृहस्पतिवार को नदी जल बंटवारे के मुद्दे को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का संकल्प लिया।
उन्होंने साथ ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की भागीदारी से जल संकट का स्थायी समाधान खोजने का निर्णय लिया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी के बीच सहमति बनी।
तीनों मुख्यमंत्री, यहां तुंगभद्रा बांध के नये 33 'स्पिलवे गेट' के उद्घाटन के दौरान पाटिल से मिले थे।
पाटिल ने उद्घाटन के बाद यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "एक समय था जब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जल बंटवारे के मुद्दों को लेकर लगातार विवाद में रहते थे। बातचीत आगे नहीं बढ़ रही थी और कोई भी एक साझा मंच पर साथ नहीं आ रहा था। लेकिन आज का दिन अच्छा है। तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री एक ही मंच पर मौजूद हैं। उन्होंने यह संकल्प लिया है कि वे आपस में विवाद नहीं करेंगे।"
पाटिल ने कहा कि मुख्यमंत्रियों ने सहमति जताई है कि केंद्र सरकार द्वारा जो भी निर्णय लिया जाएगा और जो व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं, उनके तहत यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो तथा सभी को उनके हिस्से का उचित पानी मिले।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सड़कों के माध्यम से देश को जोड़ रहे हैं और इसी तरह जल परियोजनाओं के जरिए लोगों को जोड़ना चाहते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज तीनों नेताओं ने इस दिशा में मिलकर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
पाटिल ने गाद जमने की समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पास ऐसी रिपोर्ट हैं, जिनमें जिक्र है कि देश के 6,500 बांधों में से लगभग 15 प्रतिशत भंडारण क्षमता गाद जमा होने के कारण कम हो गई है।
उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा बांध ने भी इसी कारण अपनी क्षमता का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खो दिया है।
पाटिल ने कहा, "हमारे मंत्रालय ने इस समस्या के समाधान के लिए एक योजना तैयार की है। हमने तीनों मुख्यमंत्रियों को बताया है कि हम गाद निकालने की योजना तैयार कर प्रस्तुत करेंगे। राज्य इस कार्य को पूरा करेंगे, जबकि हम उन्हें तकनीकी सहायता और सहयोग प्रदान करेंगे। इसके परिणामस्वरूप तुंगभद्रा बांध की जल भंडारण क्षमता में 25-30 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।"
पाटिल ने तीनों मुख्यमंत्रियों के सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, "जिस तरह उन्होंने बिना किसी आपत्ति के और वित्तीय सहयोग के साथ बांध के 33 गेट बदलने में सहयोग किया, मुझे विश्वास है कि उनके सामूहिक प्रयासों से गाद निकालने की परियोजना भी जल्द पूरी हो जाएगी।"
शिवकुमार ने कहा कि तीनों राज्यों ने मिलकर तुंगभद्रा नदी बेसिन के किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक सहमति वाला निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, "हमने कृषक परिवारों की सुरक्षा और संरक्षण के तरीकों पर चर्चा की। इसमें किसान नेताओं द्वारा इस बांध में पानी बचाने को लेकर की गई अपील भी शामिल थी। नवली जलाशय और गाद निकालने के मुद्दे सहित सभी विकल्पों पर चर्चा करने के बाद हम सभी एक सहमति वाले निर्णय पर पहुंचे हैं।"
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा, "आज हमने करीब एक घंटे तक जो चर्चा की, वह देश की सिंचाई व्यवस्था और संघीय व्यवस्था के इतिहास में दर्ज होगी।"
उन्होंने कहा, "हमारा पानी, हमारा अधिकार" की भावना के तहत हमने तीनों राज्यों के किसानों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।"
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने नदियों को आपस में जोड़ने की वकालत करते हुए कहा कि गंगा से लेकर कावेरी तक की नदियों को जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "एक बार ऐसा हो गया तो कोई भी भारत की प्रगति को रोक नहीं पाएगा। भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसा जरूर होगा।"
इस बीच, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय मंत्री से तुंगभद्रा नदी के अंतरराज्यीय जल बंटवारे के मुद्दे का जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकालने की अपील की।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना के गडवाल, आलमपुर व पालमुरु क्षेत्रों में किसान राजोलीबंडा डायवर्जन योजना (आरडीएस) के तहत आवंटित 17.9 हजार मिलियन घन फीट (टीएमसी) पानी में से केवल पांच-छह टीएमसी फीट पानी का ही उपयोग कर पा रहे हैं।
रेड्डी ने कहा कि विभिन्न कारणों से आवंटित 10 टीएमसी फीट अतिरिक्त पानी का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना ने पहले ही तुंगभद्रा नदी में गाद जमा होने और पानी के आवंटन से जुड़े मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के संज्ञान में लाया है।
रेड्डी ने कहा, "बैठक में हमने जल संकट का स्थायी समाधान खोजने का निर्णय लिया।"
भाषा जितेंद्र धीरज
धीरज
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