जम्मू-कश्मीर : उप राज्यपाल सिन्हा, मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने आशूरा पर इमाम हुसैन को याद किया
नरेश
- 26 Jun 2026, 03:25 PM
- Updated: 03:25 PM
(तस्वीरों के साथ)
श्रीनगर, 26 जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को इस्लामी कैलेंडर के मुहर्रम महीने के दसवें दिन यानी आशूरा के मौके पर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला आशूरा के मौके पर आयोजित एक जुलूस में स्वयं शामिल हुए।
उपराज्यपाल ने कहा, ''करबला में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की महान कुर्बानियां सच्चाई, न्याय और मानवीय गरिमा को बनाए रखने के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।''
उन्होंने लोगों से इन सार्वभौमिक आदर्शों को अपनाने और एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील तथा न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने करबला की लड़ाई में शहीद हुए इमाम हुसैन और उनके साथियों को याद करते हुए सच्चाई, न्याय और धर्म के लिए उनके अद्वितीय बलिदान की सराहना की।
आशूरा के मौके पर अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि करबला की त्रासदी साहस, दृढ़ता और ज़ुल्म के खिलाफ प्रतिरोध का एक शाश्वत प्रतीक बनी हुई है।
केंद्र शासित प्रदेश में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अपने संदेश में कहा, ''हज़रत इमाम अली मक़ाम ने अपने परिवार के सदस्यों और समर्पित साथियों के साथ जो सर्वोच्च बलिदान दिया, वह ज़ुल्म, दमन, झूठ और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध का एक अमर प्रतीक है।''
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने आशूरा के अवसर पर जारी अपने संदेश में कहा, '' करबला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके नेक साथियों की अमर कुर्बानी, जुल्म के खिलाफ सच का साथ देने, अत्याचार के मुकाबले न्याय के लिए खड़े होने और यज़ीदियत की ताकतों के सामने झुकने से इनकार करने वाले सच्चाई के एक छोटे से कारवां की कोशिशों की पराकाष्ठा है।''
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन ने कहा कि करबला की लड़ाई ज़ुल्म के खिलाफ सच्चाई और न्याय की जीत का एक शाश्वत सबूत है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी किसी समय, भूगोल या समुदाय तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह नैतिक साहस और सच्चाई की अटूट राह पर चलने का एक सार्वभौमिक प्रतीक है।
कश्मीर के मीरवाइज उमर फ़ारूक़ ने कहा कि यह बलिदान सच्चाई, सिद्धांतों और धैर्य का एक शाश्वत सबक है।
अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को उमर अब्दुल्ला यहां आशूरा के जुलूस में शामिल हुए। इस्लामिक महीने मुहर्रम के दसवें दिन सैकड़ों शिया इमाम हुसैन की शहादत का शेक मनाने के लिए आशूरा के जुलूस में शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने आशूरा के मौके पर श्रीनगर के पुराने इलाके ज़ादीबल में शोक मनाने वालों के साथ हिस्सा लिया।
अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा लगाए गए स्टॉल पर लोगों को जलपान वितरित किया। मुख्यमंत्री के साथ उनके सलाहकार नासिर असलम वानी और ज़ादीबल से विधायक तनवीर सादिक भी मौजूद थे।
काले रंग का कुर्ता-शलवार और 'किफ़ायाह' (स्कार्फ़) पहने हुए अब्दुल्ला ने शोक मनाने आए लोगों और स्वयसेवकों से संवाद भी किया।
भाषा धीरज नरेश
नरेश
2606 1525 श्रीनगर