महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित यूसीसी को लेकर बंगाल की भाजपा सरकार पर हमला बोला
नेत्रपाल
- 26 Jun 2026, 10:56 PM
- Updated: 10:56 PM
कोलकाता, 26 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और कानून-व्यवस्था से जुड़े एक विवादित विधेयक को लेकर पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार पर शुक्रवार को तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि डरा-धमकाकर और विभाजनकारी व कठोर नीतियों के जरिए विपक्ष को ''खत्म'' करने की कोशिश की जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई बैठक के बाद मोइत्रा ने पत्रकारों के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने तृणमूल कार्यकर्ताओं को बैठकें और रैलियां करने से रोककर उसे जमीनी स्तर पर कमजोर करने के मकसद से एक ''अभियान'' शुरू किया है।
उन्होंने दावा किया, ''तृणमूल कांग्रेस को जड़ से खत्म करने का अभियान चलाया जा रहा है। अगर कार्यकर्ता कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो उन्हें झूठे मामलों और पुलिस कार्रवाई की कथित तौर पर धमकी दी जा रही है।''
आपातकाल के दौर का जिक्र करते हुए मोइत्रा ने कहा कि राजनीतिक आवाज को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे तृणमूल की सालाना 21 जुलाई की शहीद रैली से पहले प्रशासन से न डरें।
उन्होंने कहा, ''लाखों मतदाताओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। आपातकाल के दौरान भी लोगों को दबाया नहीं जा सका था। 21 जुलाई का कार्यक्रम होगा और हमारे नेता हमें आगे का रास्ता दिखाएंगे।''
हालांकि, सबसे तीखा हमला राज्य के प्रस्तावित 'पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज-विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक, 2026' पर किया गया, जिसे मोइत्रा ने भारत के कुछ सबसे विवादास्पद सुरक्षा कानूनों से भी अधिक कड़ा बताया।
उनके हाथों में प्रस्तावित कानून की प्रति थी। उन्होंने दावा किया कि यह आपातकाल के दौर के 'मीसा' तथा गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) से ''कहीं अधिक कठोर'' है।
उन्होंने आरोप लगाया, ''किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसमें न्यायिक सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं हैं। यह सिर्फ शक के आधार पर पुलिस को अपार शक्तियां देता है।''
पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार, विधानसभा के जारी बजट सत्र के दौरान सोमवार को राज्य में यूसीसी विधेयक पेश करने वाली है।
सूत्रों के मुताबिक, यूसीसी के अलावा सरकार सोमवार को दो और विधेयक भी पेश करने वाली है, जिनका मकसद सार्वजनिक अव्यवस्था, तोड़-फोड़ और पुलिसकर्मियों व सरकारी कर्मचारियों पर हमलों से सख्ती से निपटना है।
हालांकि, सत्तारूढ़ भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया और तृणमूल पर सत्ता गंवाने के बाद डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित कानून का मकसद संगठित अपराध, राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति से निपटना है, जो कथित तौर पर पिछली सरकार की देन है।
मोइत्रा ने प्रस्तावित यूसीसी की भी आलोचना करते हुए कहा कि इसका मकसद सुधार के बजाय राजनीतिक है।
उन्होंने कहा, ''हमारे पास पहले से ही एक समान आपराधिक न्याय प्रणाली है। असली सवाल यह है कि इसे लोगों की भलाई के लिए लाया जा रहा है या धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण को और गहरा करने के लिए।''
इस पर, भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा, ''विपक्ष सुधार के एक कदम को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद धर्म से परे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना है।''
भाषा सुभाष नेत्रपाल
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