उप्र सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल :पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री
अविनाश
- 29 Jun 2026, 03:25 PM
- Updated: 03:25 PM
लखनऊ, 29 जून (भाषा)। उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे तीर्थ स्थलों के विकास के बाद अब राज्य सरकार ने गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
पर्यटन विभाग ने पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने एक बयान में कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा।
इसके अतिरिक्त आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को दी गयी है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा कर यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों से होते हुए गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है।
सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए।
भाषा जफर वैभव अविनाश
अविनाश
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