उप्र विधानसभा चुनाव से पहले प्रजापति संगठन ने विभिन्न राजनीतिक दलों से किया संपर्क
नरेश
- 29 Jun 2026, 06:54 PM
- Updated: 06:54 PM
(इंट्रो में एक शब्द में बदलाव के साथ रिपीट)
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) प्रजापति समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले सितंबर से उसके प्रतिनिधिमंडलों से तीन बार मुलाकात की तथा उन्होंने समुदाय के राजनीतिक हाशिए पर होने की समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया है।
संगठन ने कहा कि उसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) से भी संपर्क किया है लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
अप्रैल 2024 में स्थापित 'प्रजापति कम्युनिटी सर्विस फाउंडेशन' इस समुदाय के अधिकारों के लिए काम करता है। उसका यह बयान वर्ष 2027 की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अहम हो गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विपक्षी पार्टियां गैर-यादव ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) तक भाजपा की लगातार पहुंच बनाने की कोशिशों का मुकाबला करना चाहती हैं।
प्रजापति समुदाय को अधिकतर राज्यों में ओबीसी श्रेणी में रखा गया है। यह समुदाय बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) तथा मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। इन्हें पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने के काम से जोड़ा जाता रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इन्हें कुम्हार, कुंभार, कुमावत और कुलाल जैसे नामों से भी जाना जाता है।
इस संगठन के अध्यक्ष राजेश प्रजापति ने यहां एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करेगा कि वे समुदाय से उम्मीदवार उतारें तथा यह सुनिश्चित करें कि समुदाय को उसका उचित प्रतिनिधित्व मिले।
उन्होंने कहा कि उनका किसी विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। वह सभी पार्टियों को पत्र लिखकर उनसे मिलने का समय मांग रहे हैं ताकि प्रजापति समुदाय के संभावित उम्मीदवारों के लिए बात रख सकें।
संगठन के मुताबिक, राजनीति में उनकी भागीदारी बहुत कम है।
उसने यादव को लिखे पत्र में उनसे आग्रह किया कि वे ज़िला, खंड, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रजापति समुदाय के नेताओं की पहचान कर उन्हें सशक्त बनाएं।
संगठन ने लिखा, "एक समुदाय के रूप में हम इस तरह के कदम से काफी प्रोत्साहित होंगे और यह स्वाभाविक है कि हमारे करीब नौ करोड़ की आबादी वाले समुदाय के अधिकांश लोग भविष्य में विभिन्न राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश में आपकी समाजवादी पार्टी का समर्थन करेंगे, जहां आप पहले से ही पीडीए (पिछड़ा, दलित, आदिवासी) आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।"
भाषा प्रचेता नरेश
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