हरियाणा, असम और पंजाब नये आपराधिक कानूनों को लागू करने में सबसे आगे
नरेश
- 30 Jun 2026, 08:35 PM
- Updated: 08:35 PM
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दो साल पहले लागू हुए तीन नये आपराधिक कानूनों को लागू करने के मामले में हरियाणा, गोवा, असम, चंडीगढ़ और पंजाब देश के पांच सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरे हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि हर राज्य के प्रदर्शन का आकलन चार पैमानों -प्रशासनिक सुधार, कामकाज की दक्षता, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का इस्तेमाल और एकीकरण- पर मिले अंकों के आधार पर किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इन पैमानों का महत्व अलग-अलग होता है और इनमें समय-समय पर बदलाव और संशोधन किए जाते हैं।
तीन नये आपराधिक कानूनों -भारतीय न्याय संहिता, 2023; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023; और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023- ने ब्रिटिश-युग के आपराधिक कानूनों की जगह ली थी और इन्हें एक जुलाई, 2024 को लागू किया गया था। यह देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक अहम मोड़ था।
अधिकारियों ने बताया कि नये कानूनों का मकसद प्राथमिकी से लेकर उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले तक की प्रक्रिया को तीन साल के अंदर पूरा करना है।
इन कानूनों में एक सामान्य मंच, 'अंतर-संचालित आपराधिक न्याय प्रणाली' (आईसीजेएस) की परिकल्पना की गई है। यह प्रणाली अपराध न्याय व्यवस्था के सभी पांच मुख्य स्तंभों -पुलिस, अदालत, जेल, अपराध विज्ञान और अभियोजन- के बीच ''बेहतर तालमेल'' स्थापित करती है, ताकि व्यवस्था तेजी से काम कर सके।
तेईस राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आईसीजेएस 2.0 के नये संस्करण से पूरी तरह जुड़ चुके हैं।
अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा, गोवा, असम, चंडीगढ़ और पंजाब इन श्रेणियों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादातर राज्य राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में हैं।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने भी नये कानूनों के प्रावधानों को लागू करने में प्रगति की है।
अधिकारियों ने देश की सबसे पुरानी जेलों में से एक -प्रेसिडेंसी जेल- का उदाहरण दिया, जो नये आपराधिक कानूनों के तहत जरूरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का इस्तेमाल कर रही है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में नये आपराधिक कानूनों के तहत 90 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा के भीतर 39.56 प्रतिशत आरोप-पत्र दाखिल किये गये थे और यह आंकड़ा 2026 में बढ़कर 60.96 प्रतिशत हो गया।
इसी तरह, 60 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा वाले आरोप-पत्र का हिस्सा 2024 में 50.92 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 67.26 प्रतिशत हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, यौन अपराध के मामलों में 44 प्रतिशत आरोप-पत्र अनिवार्य दो महीने की अवधि के भीतर दायर किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 75.16 प्रतिशत हो गए।
पिछले दो वर्षों के दौरान, भारतीय न्याय संहिता के तहत 74.66 लाख प्राथमिकी, जबकि 63,572 'जीरो' प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
देश भर की पुलिस ने ई-साक्ष्य ऐप्लिकेशन का उपयोग करके 46.50 लाख साक्ष्य आईडी बनाईं।
साथ ही, आठ नयी केंद्रीय अपराध जांच विज्ञान प्रयोगशालाओं को मंज़ूरी दी गई है, जिससे इनकी कुल संख्या 15 हो गई है।
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