अंबाला में बोरवेल में गिरे चार वर्षीय बच्चे की मौत
सिम्मी
- 01 Jul 2026, 08:31 AM
- Updated: 08:31 AM
अंबाला, एक जुलाई (भाषा) हरियाणा के अंबाला जिले में 220 फुट गहरे बोरवेल में गिरे चार वर्षीय बच्चे को 21 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद बुधवार तड़के बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
निरवैर सिंह को मंगलवार सुबह शुरू हुए विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के बाद बुधवार तड़के तीन बजकर 40 मिनट पर बोरवेल से बाहर निकाला गया और उसे तुरंत एम्बुलेंस से अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि बच्चे को जब आपातकालीन वार्ड में लाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
यह घटना मंगलवार सुबह करीब साढ़े छह बजे अंबाला जिले के धन्यौड़ा गांव में हुई। निरवैर सिंह अपने पिता मनजीत के साथ खेत में अपने दादा करनैल सिंह के लिए खाना लेकर गया था।
परिवार के अनुसार, करनैल सिंह सुबह ही खेत में काम करने चले गए थे, जबकि मनजीत बाद में उनके लिए खाना लेकर पहुंचे। निरवैर ने भी अपने पिता के साथ जाने की जिद की, जिसके बाद मनजीत उसे साथ ले गए।
खेत पर पहुंचने के बाद मनजीत काम में लग गए और करनैल सिंह खाना खाने लगे। निरवैर पहले अपने दादा के पास बैठा रहा लेकिन कुछ देर बाद खेलने लगा। खेलते-खेलते उसकी नजर खुले बोरवेल पर पड़ी और वह उसमें मिट्टी डालने लगा। माना जा रहा है कि जब वह बोरवेल के अंदर झांकने के लिए झुका, तभी आसपास की गीली मिट्टी धंस गई और उसका पैर फिसलने से वह बोरवेल में गिर गया।
मनजीत ने बताया कि अचानक तेज आवाज सुनकर उनका ध्यान उधर गया। वे तुरंत बोरवेल के पास पहुंचे और निरवैर को आवाज लगाई।
सूचना मिलते ही उपायुक्त (डीसी) अजय सिंह तोमर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और सेना की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया।
तोमर ने बताया कि बोरवेल का व्यास करीब नौ इंच और गहराई लगभग 220 फुट है। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आपातकालीन बचाव दलों को मौके पर भेज दिया।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी मंगलवार शाम घटनास्थल पर पहुंचे।
उपायुक्त ने मंगलवार को कहा था कि बोरवेल को खुला छोड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस को दे दिए गए हैं।
तोमर ने किसानों से अपने खेतों में बोरवेल को खुला न छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि यदि बोरवेल ढका होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
पंजाब के होशियारपुर में भी पिछले महीने ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें चार वर्षीय एक बच्चा अपने घर के पास नए बोरवेल में गिर गया था। हालांकि, कई बचाव एजेंसियों और स्थानीय स्वयंसेवकों ने करीब नौ घंटे तक चले अभियान के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के एक गांव में 2006 में बोरवेल में गिरे पांच वर्षीय प्रिंस को बचाने के लिए भी बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था। करीब 48 घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
भाषा खारी सिम्मी
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