तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की; ममता खेमे ने सवाल उठाए
सुरेश
- 03 Jul 2026, 01:22 AM
- Updated: 01:22 AM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई बृहस्पतिवार को तेज हो गई। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी पर अपना दावा पेश किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी से निष्कासित नेताओं को सुनवाई का अवसर देने को लेकर आयोग की आलोचना की।
इस बीच निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के विरोधी गुटों से कहा कि वे पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों को लेकर अपने दावे और जवाबी दावे पेश करें। इस फैसले पर ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा रखने वाले सौगत रॉय और सागरिका घोष ने सवाल उठाए।
अधिकारियों ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी, दोनों को पत्र भेजकर छह जुलाई को शाम 5:30 बजे तक उनका जवाब देने को कहा है।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात की। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि यह बैठक नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही निर्वाचन आयोग से मिलने के लिए समय मांग सकते हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने 22 जून को कोलकाता में गुट के विशेष संगठनात्मक सत्र के बारे में जानकारी देने के बाद आयोग के सामने औपचारिक रूप से अपना पक्ष रखा।
ऋतब्रत ने कहा, ''हम आभारी हैं कि आज पूर्ण पीठ -मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों- ने हमारी बात धैर्यपूर्वक सुनी। हमने अपनी बात रख दी है। हमें उम्मीद है कि आयोग जल्द ही हमें जवाब देगा।''
ऋतब्रत बनर्जी ने आयोग को सौंपे गए दस्तावेज़ों का खुलासा करने से इनकार कर दिया, लेकिन जोर देकर कहा कि 22 जून को संगठनात्मक बैठक आयोजित करते समय उन्होंने सभी नियमों का पालन किया।
उन्होंने कहा, ''असली तृणमूल कांग्रेस हम ही हैं। दो-तिहाई से ज्यादा विधायक हमारे साथ हैं। पार्षद भी हमारे साथ हैं।''
बगावत को वैचारिक आंदोलन के रूप में पेश करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "मेरी पूरी लड़ाई व्यक्ति-पूजा और निर्मम वंशवादी राजनीति के खिलाफ है, जिसने धीरे-धीरे जमीनी स्तर की पार्टी की मूल भावना को खत्म कर दिया है। समान विचारों में विश्वास रखने वाले सभी लोग एक साथ आए हैं। बंगाल के लोग वंशवादी राजनीति का समर्थन नहीं करते।"
उन्होंने कहा, "अरूप रॉय और जावेद खान पार्टी के संस्थापक सदस्यों में हैं। यह सामूहिक सोच है।"
बागी गुट के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जाने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा, "हम भाजपा के खिलाफ हैं।"
तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि यह बैठक निर्वाचन आयोग (ईसी) की प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं थी।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सौगत रॉय और सागरिका घोष ने दावा किया कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग से मिलने का समय मांग सकते हैं और कहा कि पार्टी ने ऐसी किसी बैठक का अनुरोध नहीं किया था।
रॉय ने पूछा, ''निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को सूचित किया था कि केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही बैठक का अनुरोध कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस ने बैठक के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। तृणमूल द्वारा निष्कासित व्यक्ति को आयोग ने किस आधार पर मिलने का समय दिया?''
घोष ने आरोप लगाया कि आयोग, भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आयोग को प्रभावित कर रही है।
घोष ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने अपने ही नियमों की अनदेखी की है।
उन्होंने आरोप लगाया, "तृणमूल कांग्रेस ने कोई पत्र नहीं भेजा है। इसके बावजूद पार्टी से निष्कासित एक व्यक्ति के नेतृत्व वाला एक समूह पूर्ण पीठ से मिला। निर्वाचन आयोग के अपने नियमों के अनुसार यह कैसे हुआ? यह अभूतपूर्व और असंवैधानिक है।"
राजनीतिक दल और उसके विधायक दल के बीच अंतर बताते हुए घोष ने उच्चतम न्यायालय के शिवसेना संबंधी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विधायक दल का न तो विलय हो सकता है और न ही उसका विभाजन।
उन्होंने आरोप लगाया, "यह ऐसा कौन-सा समूह है, जिसका एक भी सांसद नहीं है? उसे पूर्ण पीठ से मिलने का समय सिर्फ इसलिए मिला क्योंकि उसके पीछे भाजपा और अमित शाह हैं।"
तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सदस्य महुआ मोइत्रा ने बागी गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी असलियत साबित करने की जरूरत केवल "नकली" लोगों को पड़ती है।
मोइत्रा ने कहा, "कौन किससे मिल रहा है, इस पर मैं क्या टिप्पणी करूं... जो नकली हैं, उन्हें ही चिल्लाकर कहना पड़ता है कि वे असली हैं।"
इस पर पलटवार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यही "अहंकार" टीएमसी के पतन का कारण बना है।
उन्होंने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, "महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से साफ पता चलता है कि कालीघाट अब भी इनकार की स्थिति में है... इसी अहंकार ने इतना बड़ा पतन कराया है। वे अब भी सच्चाई स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।"
उन्होंने कहा, "इस तरह की सोच लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं है, लेकिन यह उनका विशेषाधिकार है, इसलिए उन्हें ऐसा करते रहने दीजिए। मुझे इससे अधिक कुछ नहीं कहना है। बंगाल की जनता ने इस सोच और इस तानाशाही मानसिकता के खिलाफ स्पष्ट जनादेश दिया है।"
पश्चिम बंगाल में भाजपा के हाथों सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल की मुश्किलें शुरू हुईं।
पिछले सप्ताह बागी गुट ने कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में दस्तावेज जमा किए और अलग से निर्वाचन आयोग से संपर्क करके दावा किया कि वही मूल तृणमूल का प्रतिनिधित्व करता है।
गुट ने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक ढांचे पर दावा करते हुए कहा कि उसे पार्टी के अधिकांश विधायकों और पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है।
भाषा अमित सुरेश
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