घोटाला और कर्ज के आरोपों को लेकर हैदराबाद में नाटक, तेलंगाना के मंत्री बहस के लिए शहीद स्मारक पहुंचे
रंजन
- 02 Jul 2026, 05:18 PM
- Updated: 05:18 PM
हैदराबाद, दो जुलाई (भाषा) हैदराबाद में बृहस्पतिवार को उस समय ज़बरदस्त ड्रामा देखने को मिला, जब कांग्रेस सरकार के मंत्री विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं के साथ सार्वजनिक बहस के लिए तेलंगाना शहीद स्मारक पहुंच गये।
दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर घोटाले और कर्ज़ बढ़ाने के आरोप लगाये हैं।
जब बीआरएस नेता टी. हरीश राव बहस के लिए शहीद स्मारक जाने के लिए अपने पार्टी कार्यालय से निकले, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। राव ने दावा किया कि मंत्रियों तक पहुंचने की उनकी कोशिश नाकाम रही।
इसकी शुरुआत तब हुई जब राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर, अनुसूचित जाति विकास मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अज़हरुद्दीन समाज कल्याण आवासीय विद्यालयों की निविदा में 2,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों पर बहस के लिए विधानसभा परिसर के सामने तेलंगाना शहीद स्मारक पहुंचे।
बीआरएस नेता आर.एस. प्रवीण कुमार ने भ्रष्टाचार का यह आरोप लगाया था। उन्होंने लक्ष्मण कुमार और अन्य लोगों को समाज कल्याण आवासीय विद्यालयों के लिए कुछ सामान खरीदने की निविदा में भ्रष्टाचार के आरोपों पर बहस की चुनौती दी।
प्रभाकर ने शहीद स्मारक पर पत्रकारों से बातचीत में इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि निविदा 2,000 करोड़ रुपये की नहीं है।
प्रभाकर ने कहा कि वह और उनके कैबिनेट सहयोगी बीआरएस के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए विधायकों के साथ बहस करने के लिए तैयार हैं, लेकिन दूसरों के साथ नहीं।
इस बीच बीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के भतीजे एवं पार्टी विधायक हरीश राव मंत्रियों के साथ बहस करने के लिए पार्टी मुख्यालय से शहीद स्मारक की ओर निकले।
लेकिन पुलिस ने हरीश राव और अन्य नेताओं को टीआरएस मुख्यालय के बाहर रोक दिया।
एक नाटकीय घटनाक्रम में, कार में बैठे हरीश राव ने दावा किया कि उन्होंने मंत्रियों-- प्रभाकर, लक्ष्मण कुमार और अज़हरुद्दीन को फ़ोन किया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि उन्हें पुलिस शहीद स्मारक जाने से न रोके। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्रियों ने उनके फ़ोन का कोई जवाब नहीं दिया।
बीआरएस कार्यकर्ताओं की नारेबाजी के बीच, राव ने कहा कि वह पैदल ही शहीद स्मारक तक जायेंगे।
पुलिस उन्हें वहां से ले गई। पत्रकारों से बात करते हुए हरीश राव ने पूछा कि अगर कांग्रेस सरकार ने निविदा में कोई गड़बड़ी नहीं की है, तो वह पुलिस का इस्तेमाल करके उन्हें क्यों रोक रही है।
इसके अलावा, राज्य के आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव भी बाद में शहीद स्मारक पहुंचे, ताकि बीआरएस के कार्यकाल के दौरान सरकार पर चढ़े कर्ज़ पर बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव के साथ बहस कर सकें।
केटीआर के इस दावे को खारिज करते हुए कि बीआरएस के कार्यकाल में कुल कर्ज़ सिर्फ़ 2.80 लाख करोड़ रुपये था, कृष्णा राव ने कहा कि बीआरएस सरकार पर कुल कर्ज़ लगभग आठ लाख करोड़ रुपये था।
भाषा राजकुमार रंजन
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