दिल्ली की अदालत ने हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा
माधव
- 02 Jul 2026, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को सीबीआई की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें तीन करोड़ रुपये की कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत से और पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में भेजने का अनुरोध किया गया था।
एजेंसी ने यह कहते हुए गहलावत की हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया कि उसे बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने, पैसे के स्रोत और उससे फायदा उठाने वालों की पहचान करनी है। एजेंसी ने मामले के दूसरे सह-आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ किए जाने की आवश्यकता का हवाला दिया।
हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई की अर्जी खारिज की जाती है। उन्होंने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया।
वर्ष 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी गहलावत, जो नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे, को सीबीआई की एक दिन की हिरासत पूरी होने के बाद शाम करीब चार बजे विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा के सामने पेश किया गया।
बुधवार को अदालत ने गहलावत को एक दिन के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की हिरासत में भेज दिया था। सीबीआई ने अधिकारी की पांच दिन की हिरासत का अनुरोध किया था।
गहलावत को नकली दवा बनाने वाले गिरोह की जांच के सिलसिले में तीन करोड़ रुपये की कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
सरकारी वकील ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान आरोपी टालमटोल करता रहा, उसने जांच को गुमराह किया और कई वित्तीय लेन-देन के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
बहस के बाद, न्यायाधीश ने इस दलील पर गौर किया कि आरोपी ने 14 मई को दूसरे सह-आरोपियों के साथ एक साजिश वाली बैठक की थी। न्यायाधीश ने पूछा, ''कथित बैठक के बाद वित्तीय लेन-देन का कोई रिकॉर्ड है? एन राजा (सह-आरोपी) 14 मई को उनसे मिलने आया था। क्या उसके बाद कोई लेन-देन हुआ?''
उन्होंने अभियोजन पक्ष से फिर एक सवाल पूछा, ''आप कह रहे हैं कि उन्होंने (आरोपी ने) हिरासत में पूछताछ के दौरान विरोधाभासी और टालमटोल वाले जवाब दिए और बेतुकी बातें कहीं। विरोधाभासी और टालमटोल वाले जवाब, ये आपने किस संदर्भ में कहा?''
इसके बाद न्यायाधीश ने सरकारी वकील से वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड जमा करने को कहा और गौर किया कि 14 मई को हुई तथाकथित ''साजिश वाली बैठक'' के बाद कोई लेन-देन नहीं हुआ था।
उन्होंने कहा, ''अगर आप किसी दस्तावेज पर भरोसा कर रहे हैं और ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं, तो इससे आपके आचरण के बारे में क्या पता चलता है? आप समय लें, लेकिन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराएं।''
अधिकारियों के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत कथित अपराध के समय बीसीएएस में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात थे। गहलावत पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत के एवज में अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर सीबीआई अधिकारियों से संपर्क के जरिए पुडुचेरी के एक कारोबारी को अनुकूल जांच परिणाम का भरोसा दिया था।
यह गिरफ्तारी सीबीआई द्वारा आठ जून को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के निरीक्षक प्रदीप सिंह, कथित बिचौलिये राजकुमार और कारोबारी एन. राजा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी है।
सीबीआई ने बताया है कि पिछले महीने एजेंसी द्वारा चलाए गए एक अभियान के दौरान सिंह, राजकुमार और पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान 25 लाख रुपये की रिश्वत की रकम, 90 लाख रुपये अतिरिक्त और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए थे।
उसके अनुसार, जांच के दौरान पता चला कि आईपीएस अधिकारी ने दावा किया था कि वह अपने व्यक्तिगत प्रभाव का इस्तेमाल कर पुडुचेरी में नकली दवाओं की बिक्री से जुड़ी सीबीआई जांच वाले मामलों में निजी व्यक्तियों को राहत दिला सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, राजा इस साल की शुरुआत में दर्ज कथित नकली दवा बनाने संबंधी मामले में सीबीआई जांच का सामना कर रहे थे। उन्होंने सिंह से संपर्क किया।
इसके बाद सिंह ने एयरोसिटी स्थित अपने कार्यालय में राजा और गहलावत की मुलाकात कराई, जहां आईपीएस अधिकारी ने कथित तौर पर 'अनुकूल जांच' के बदले तीन करोड़ रुपये की मांग की। इसमें 1.5 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि भी शामिल थी।
भाषा
शफीक माधव
माधव
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