कांग्रेस की पंजाब इकाई में फेरबदल के बाद असंतोष; चन्नी के समर्थन में कई मौजूदा और पूर्व विधायक
दिलीप
- 03 Jul 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
चंडीगढ़, तीन जुलाई (भाषा) कांग्रेस की पंजाब इकाई में शुक्रवार को गुटबाजी खुलकर सामने आ गई, जब पार्टी द्वारा अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने के फैसले के बाद कई मौजूदा और पूर्व विधायक पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश इकाई का प्रमुख बनाने के लिए उनके समर्थन में उतर आए।
पंजाब से कांग्रेस के कम से कम छह मौजूदा विधायक, कई पूर्व विधायक और कई वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन करते हुए पंजाब के रूपनगर जिले में चन्नी के आवास पर एकत्र हुए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजा वडिंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया है। बुधवार को 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की विभिन्न समितियों की घोषणा के साथ इस फैसले की भी घोषणा की गई थी।
पंजाब विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होने हैं। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि अहम चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने के लिए चन्नी को कांग्रेस की पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
जालंधर से सांसद और दलित समुदाय से आने वाले चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान की योजना बनाने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है।
चन्नी के आवास पर करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने केंद्रीय नेतृत्व द्वारा वडिंग को पद पर बनाए रखने के फैसले की ओर स्पष्ट संकेत करते हुए कहा कि लोगों में नाराजगी और निराशा की भावना है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाजवा के साथ विधायक राणा गुरजीत सिंह और सुखबिंदर सिंह सरकारिया भी मौजूद थे। बाजवा ने कहा कि यह फैसला लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा, ''हमें पार्टी आलाकमान से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन हमने चन्नी से कहा है कि वह केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात का समय लें। हम कुछ बातें उनके सामने रखना चाहते हैं ताकि ऐसा फैसला लिया जाए, जिससे कांग्रेस को लाभ हो और पार्टी राज्य में सत्ता में आए। यही जनता की भी इच्छा है।''
हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा, ''यह कोई बगावत नहीं है।''
पूर्व विधायक परमिंदर सिंह पिंकी ने कहा कि बैठक में सभी नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा, ''पूरा पंजाब चन्नी के साथ है। हमने चन्नी से आग्रह किया है कि वह आलाकमान से बात करें ।''
कांग्रेस विधायक हरदेव सिंह लाडी ने कहा कि वह पार्टी के सामने 'पंजाब के लोगों की मांग' रखेंगे।
पूर्व विधायक दर्शन सिंह बराड़ ने कहा, ''राजा वडिंग के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में नहीं आ सकती।''
पूर्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़ ने कहा, ''हमें जनता के बीच जाकर वोट मांगने हैं और लोग चाहते हैं कि चन्नी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनें।'' पार्टी नेता बरिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा कि यह लड़ाई किसी पद के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा, ''लड़ाई पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) को हराने की है। इसके लिए एक रणनीति और एक फार्मूला तैयार करना होगा और चन्नी साहब ही इस लड़ाई का प्रभावी ढंग से नेतृत्व कर सकते हैं तथा 'आप' को सत्ता से बाहर कर सकते हैं।''
पूर्व सांसद मोहम्मद सादिक ने कहा कि सभी नेता चन्नी के समर्थन में एकजुट हैं। उन्होंने कहा, ''यह कोई बगावत नहीं है, बल्कि जनता की मांग पर बुलाई गई बैठक थी।''
इस बीच, गुटबाजी खुलकर सामने आने के बीच कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और सीमावर्ती राज्य पंजाब में 'बिगड़ती' कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया।
चन्नी के आवास पर हुई बैठक के बारे में पूछे जाने पर रंधावा ने कहा, ''चन्नी ही बैठक के बारे में बता सकते हैं। जैसा कि आप देख सकते हैं, मैं दिल्ली में हूं।''
संगठनात्मक फेरबदल पर उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''जब पार्टी की सूची आती है और इस तरह की स्थिति बनती है, तो नुकसान होता है। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आलाकमान द्वारा हालिया नियुक्ति किए जाने से पहले इतनी बैठकों के बावजूद यदि असंतोष बना हुआ है, तो यह दुखद बात है।''
उधर, चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि कांग्रेस में इस तरह की बातें नई नहीं हैं। उन्होंने चन्नी के भाजपा में शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।
उन्होंने कहा, ''मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि जो भी आएगा, उसका स्वागत किया जाएगा।''
खबरों से पता चलता है कि चन्नी प्रदेश पार्टी अध्यक्ष के पद के लिए उनकी अनदेखी किए जाने से नाराज हैं। यह भी कहा जा रहा है कि नयी नियुक्तियों की घोषणा के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद देने के लिए की जाने वाली औपचारिक बातचीत भी नहीं की।
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था।
हालांकि चुनाव में पार्टी सत्ता गंवा बैठी और प्रदेश में आम आदमी पार्टी (आप) सत्ता में आयी ।
चन्नी के आवास पर जुटने वाले नेताओं में पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ. पी. सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और पूर्व विधायक नजर सिंह मनशाहिया, गुरकीरत सिंह कोटली, लखवीर सिंह लखा और तरसेम सिंह शामिल थे।
हालिया संगठनात्मक फेरबदल में पार्टी ने पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद पर भी कोई बदलाव नहीं किया। यह पद फिलहाल प्रताप सिंह बाजवा के पास है।
गुरदासपुर से सांसद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के दावेदारों में शामिल सुखजिंदर सिंह रंधावा को पार्टी की कोर कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले गुटबाजी पर अंकुश लगाने के प्रयास के तहत पार्टी ने कई नेताओं को विभिन्न चुनावी समितियों में स्थान दिया है।
भाषा रंजन रंजन दिलीप
दिलीप
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