निकाह हलाला के नाम पर नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपियों की याचिका खारिज
सुरेश
- 03 Jul 2026, 10:38 PM
- Updated: 10:38 PM
प्रयागराज, तीन जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निकाह हलाला की आड़ में नाबालिग लड़की के साथ बार-बार दुष्कर्म करने के आरोपियों की प्राथमिकी रद्द करने संबंधी याचिका इस टिप्पणी के साथ खारिज कर दी कि ''पॉक्सो अधिनियम, पर्सनल लॉ से ऊपर है''।
वर्ष 2016 के दौरान जब शिकायतकर्ता नाबालिग थी, निकाह हलाला के नाम पर नौ व्यक्तियों ने उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और बाद में 2025 में वयस्क होने पर उसके साथ 'डबल हलाला' के नाम पर भी कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने तैय्यब और तीन अन्य व्यक्तियों की रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि हलाला की आड़ में एक नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाया जाता है, भले ही उसने तलाक देने वाले व्यक्ति से फिर से शादी करने की इच्छा जताई हो, तब भी निश्चित तौर पर पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।
इन आरोपियों के खिलाफ अमरोहा जिले के सैदनागली पुलिस थाना में बीएनएस, मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और पॉक्सो अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि 2016 में शरिया कानून के तहत तीन तलाक लागू था। निकाह हलाला एक वैध रस्म है। चूंकि लड़की ने बालिग होने के एक साल के भीतर इसे अस्वीकार नहीं किया, इसलिए शादी मान्य थी।
वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि ये आरोप साफ तौर पर एक नाबालिग के यौन शोषण का रूप दिखाते हैं, जिसके बाद 'डबल हलाला' के नाम पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
उन्होंने दलील दी कि पर्सनल लॉ को भारतीय न्याय संहिता के तहत सामूहिक दुष्कर्म के कृत्यों से बचने का ढाल नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया यह एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और बाद में उसी आड़ में बहुत ही बर्बर और वीभत्स सामूहिक दुष्कर्म का मामला है।
अदालत ने 'इंडिपेंडेंट थॉट बनाम केंद्र सरकार' के मामले में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने पॉक्सो अधिनियम को प्राथमिकता दी थी और 18 साल के कम उम्र की लड़की के साथ कानूनी तौर पर शारीरिक संबंध बनाने की किसी भी संभावना को खत्म किया था।
अदालत ने यह दलील खारिज कर दी कि निकाह कराने वाले काजी या दूर के रिश्तेदारों जैसे कुछ आरोपियों की इस मामले में मामूली भूमिका थी। अदालत ने माना कि सभी आरोपी इस गंभीर अपराध में शामिल थे।
अदालत ने एक जुलाई के अपने निर्णय में कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस द्वारा विस्तृत जांच की जरूरत है।
भाषा सं राजेंद्र
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