कॉजपा ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर उनसे विरोध-प्रदर्शन को लेकर 'गहरी चुप्पी' तोड़ने का आग्रह किया
प्रशांत
- 04 Jul 2026, 08:51 PM
- Updated: 08:51 PM
नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित एक खुला पत्र लिखा और उनसे जंतर-मंतर पर संगठन के विरोध-प्रदर्शन को लेकर अपनी ''गहरी चुप्पी'' तोड़ने और कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक व छात्रों की आत्महत्या के मामलों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराने की मांग की गई।
"इंसानियत का सवाल: आप कब तक जंतर-मंतर को नजरअंदाज करेंगे?" शीर्षक वाले दो पन्नों के पत्र में कॉजपा ने कहा कि उनका विरोध-प्रदर्शन 15वें दिन में प्रवेश कर गया है, जबकि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का सातवां दिन है।
कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ताओं सौरव दास, आशुतोष रांका, वैष्णवी गौड़, आफरीन नवाज, दीपक बलियान, रत्ना सिंह और विजेता दहिया द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में यह भी सवाल किया गया कि 20 जून को जंतर मंतर पर शुरू हुए उनके आंदोलन के बावजूद प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।
पत्र में कहा गया, ''हम पिछले 15 दिनों से जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और आज शिक्षाविद सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का सातवां दिन है। महोदय, आपकी सरकार हमारी आवाज को और कितने समय तक नजरअंदाज करती रहेगी?''
इसमें कहा गया, ''नागरिक समाज में भूख हड़ताल का मतलब होता है कि सत्ता में बैठे लोगों पर नैतिक दबाव डाला जाए। इसका मूल सिद्धांत आसान है - जब सोनम वांगचुक जैसा कोई व्यक्ति, जिसने अपनी पूरी जिंदगी, मन और आत्मा इस देश और शिक्षा के लिए लगा दी है, भूख हड़ताल शुरू कर देता है, तो उम्मीद की जाती है कि उस समय की सरकार से एक सोची-समझी प्रतिक्रिया मिलेगी, चाहे वह नैतिक हो या राजनीतिक।''
इसमें कहा गया, ''फिर भी, आपने एक शब्द भी नहीं कहा।''
कॉजपा ने कहा कि यह प्रदर्शन बार-बार परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने, शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने से इनकार करने, तथा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय दिलाने में सरकार की ''नाकामी'' के खिलाफ शुरू किया गया था।
पत्र में कहा गया, ''हम यहां इसलिए बैठे हैं क्योंकि आपकी सरकार बार-बार परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने में नाकाम रही है, जिससे करोड़ों युवा भारतीयों का भरोसा टूट गया है।''
कॉजपा ने दावा किया कि 20 जून को विरोध-प्रदर्शन शुरू होने से पहले ऐसी मौतों की संख्या 11 थी, जो बढ़कर 29 हो गई।
पत्र में कहा गया, ''कोई भी सरकार सवाल-जवाब से ऊपर नहीं है। कोई भी मंत्री जिम्मेदारी से ऊपर नहीं है। और कोई भी प्रशासन जवाब मांगने वाले नागरिकों की आवाज नहीं दबा सकता।''
प्रधानमंत्री पर ''पूरी तरह चुप्पी'' साधने का आरोप लगाते हुए, कॉजपा ने कहा कि केंद्र सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बजाय उनके प्रति तिरस्कारपूर्ण रवैया अपनाया।
भाषा शफीक प्रशांत
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