ममता की बागियों को खुली चुनौती : भाजपा में शामिल होकर सामना करें
पवनेश
- 04 Jul 2026, 09:44 PM
- Updated: 09:44 PM
कोलकाता, चार जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने वाले बागी गुट पर तीखा हमला करते हुए पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को बागियों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर तृणमूल में फूट डालने की साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो जाएं।
पार्टी के अब तक के सबसे बड़े संकट के बीच पहली बार 'फेसबुक लाइव' के जरिए भावुक संबोधन में ममता बनर्जी ने अपने नेतृत्व का बचाव किया, बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला, प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद तृणमूल कांग्रेस की 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली हर हाल में आयोजित करने का संकल्प जताया और कहा कि लोग पार्टी छोड़ सकते हैं, लेकिन इससे ''कोई संस्था खत्म नहीं होती।''
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने दावा किया कि उसके सत्ता में आने के बाद 'कट मनी' का सिलसिला बंद हो गया है, जो ''पार्टी को जोड़े रखने का काम करता था।''
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट को एक और झटका उस समय लगा, जब पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इस बीच, ममता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा, ''मैं उन विश्वासघाती और एहसान फरामोश लोगों को चुनौती देती हूं, जो पार्टी छोड़ रहे हैं। अगर उनमें हिम्मत है तो सीधे भाजपा में शामिल होकर मेरा मुकाबला करें, बजाय इसके कि भाजपा के इशारे पर यह बेईमानी भरा खेल खेलें।''
ममता बनर्जी ने घोषणा की कि पार्टी की अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह तब तक तृणमूल की प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व भी निभाएंगी, जब तक कि वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते हैं। बख्शी फिलहाल अस्वस्थ हैं।
ममता ने पार्टी नेताओं कुणाल घोष और मदन मित्रा को पार्टी का महासचिव नियुक्त करने की भी घोषणा की।
बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ''आप खुद को विद्रोही कहते हैं? चुनाव से पहले आपका विद्रोह कहां था? पिछले 15 वर्षों में, जब आप तृणमूल के टिकट पर सांसद और विधायक बने, मंत्री रहे और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे, तब आपका असंतोष कहां था? तब आप मेरे पास आकर अपने मतभेद क्यों नहीं रखते थे?''
ममता ने कहा कि इन ''कठिन परिस्थितियों'' में जो कार्यकर्ता पार्टी के प्रति वफादार बने हुए हैं, वही ''पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी'' हैं।
उन्होंने ''विश्वासघात करने वाले और अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर पार्टी छोड़ने वाले'' बागी नेताओं को सलाह दी कि ''वे कम-से-कम उन लोगों के साथ विश्वासघात न करें, जिन्होंने उन्हें वोट देकर जिताया था।''
भट्टाचार्य के पार्टी छोड़ने के सवाल को ज्यादा अहमियत न देते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ''चंद्रिमा काफी समय से कह रही थीं कि वह इस्तीफा देना चाहती हैं। उनका बेटा पहले ही उन लोगों (बागी गुट) के साथ जा चुका था। यदि इक्का-दुक्का नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में चले जाते हैं तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।''
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट द्वारा पार्टी के 'दो फूल' चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि बंगाल की जनता ऐसे ''विश्वासघाती षड्यंत्रों'' को समझती है।
उन्होंने कहा, ''मुझे पार्टी के चुनाव चिह्न की कोई चिंता नहीं है, हालांकि मुझे पता है कि वे इसे हमसे छीन नहीं पाएंगे। उन्हें सफलता नहीं मिलेगी, क्योंकि मैं इस चुनाव चिह्न को गले में लटकाकर जनता के बीच जाऊंगी। कई लोगों ने पार्टी से विश्वासघात किया और उसे छोड़ दिया। वे केवल इसलिए जीत सके क्योंकि उनके नामांकन पत्रों पर मैंने हस्ताक्षर किए थे। भाजपा के इशारे पर उन्होंने पार्टी से गद्दारी की है।''
उन्होंने कहा, ''लेकिन यदि वे 'वैनिश कुमार' का इस्तेमाल करके भी पार्टी का चुनाव चिह्न छीनने की कोशिश करें, तब भी वे मेरी आवाज नहीं दबा पाएंगे। व्यक्ति पार्टी छोड़ सकते हैं, लेकिन कोई संस्था खत्म नहीं होती।'' माना जा रहा है कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जानबूझकर 'वैनिश कुमार' कहकर संबोधित किया।
बनर्जी ने शुक्रवार को बागी गुट द्वारा पार्टी के कार्यवाहक मुख्यालय पर कब्जा करने और उनके समर्थकों की आवाजाही रोकने के लिए मुख्य द्वार पर नए ताले लगाने के प्रयास की भी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा, ''कोई भी तृणमूल कांग्रेस की संपत्ति नहीं लूट सकता। हमारी पार्टी की चीजों पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। आप केंद्रीय बलों को साथ लेकर हमारे दफ्तरों पर ताले लगा रहे हैं। आप किसी इमारत पर ताला लगा सकते हैं, लेकिन लोगों के दिलों पर ताला नहीं लगा सकते।''
बनर्जी ने दावा किया कि भवन मालिकों के साथ किराया समझौता अक्टूबर 2027 तक वैध है और पार्टी नियमित रूप से परिसर का किराया, रखरखाव और बिजली बिल का भुगतान करती रही है।
राज्य के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर बोलते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा, ''मैं आज मुख्यमंत्री बने व्यक्ति को शुभकामनाएं देती हूं। लेकिन उन्हें याद दिलाना चाहती हूं कि वह कभी तृणमूल कांग्रेस में थे। उससे पहले वह कांग्रेस में भी थे। उन्होंने कई चुनाव हारे और मैं बार-बार उनके निर्वाचन क्षेत्र में उनके लिए प्रचार करने गई। वह मेरा कर्तव्य था और उसका मैं कोई श्रेय नहीं लेती।''
ममता बनर्जी के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता इसलिए पार्टी छोड़ रहे हैं क्योंकि 'कट मनी' की संस्कृति अब बंद हो चुकी है, जो पार्टी को जोड़े रखने का काम करती थी।
उन्होंने कहा, ''राज्य के आधुनिक इस्लामी इतिहास के पाठ्यक्रम के अलावा इतिहास में इस पार्टी की कोई जगह नहीं होगी।''
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