राम मंदिर ट्रस्ट को आरटीआई के दायरे से बाहर रखने की समीक्षा करे सरकार: ब्रिटास
नेत्रपाल
- 05 Jul 2026, 04:43 PM
- Updated: 04:43 PM
(दूसरे पैरा में सुधार के साथ)
नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एवं राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार से अपने उस रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है जिसके अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत ''लोक प्राधिकरण'' नहीं है।
ब्रिटास ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही के हित में अपने रुख की समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चार जुलाई को लिखे पत्र में कहा कि ट्रस्ट की स्थापना की परिस्थितियां विशिष्ट हैं।
ब्रिटास ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले के बाद केंद्र सरकार ने ट्रस्ट के संचालन से जुड़ी योजना बनाई, राजपत्र अधिसूचना के जरिए उसका गठन किया और अधिगृहीत भूमि उसे सौंपी। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के 15 सदस्यों में से 12 को शुरुआत में सरकार ने नामित किया था।
माकपा नेता ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के छह जून 2025 के उस आदेश का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि ट्रस्ट आरटीआई अधिनियम के तहत ''लोक प्राधिकरण'' नहीं है।
उन्होंने कहा कि आयोग ने अपने फैसले में काफी हद तक गृह मंत्रालय के रुख पर भरोसा किया, इसलिए मंत्रालय को पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही के हित में अपने रुख की समीक्षा करनी चाहिए।
ब्रिटास ने कहा कि केंद्र की इस दलील पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अधिसूचना जारी होने के कारण ट्रस्ट को सरकारी अधिसूचना के जरिये स्थापित या गठित संस्था नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच)(डी) सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से जारी अधिसूचना और न्यायिक निर्देश के अनुपालन में जारी अधिसूचना के बीच कोई अंतर नहीं करती।
ब्रिटास ने कहा कि ट्रस्ट के संचालन ढांचे में केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार का संस्थागत प्रतिनिधित्व लगातार बना हुआ है और दोनों सरकारों के सेवारत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी इसमें शामिल हैं जो उसके प्रशासन से सरकार के निरंतर जुड़ाव को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह तय करते समय सरकार की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि ट्रस्ट को आरटीआई अधिनियम के तहत पारदर्शिता के मानकों के दायरे में लाया जाना चाहिए या नहीं।
ब्रिटास ने कहा कि जनता ने ट्रस्ट पर जो ''असाधारण विश्वास'' जताया है, उसके साथ पारदर्शिता की उतनी ही मजबूत अपेक्षा भी स्वाभाविक रूप से जुड़ी है।
उन्होंने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का उदाहरण देते हुए कहा कि संस्थागत स्वायत्तता और सार्वजनिक जवाबदेही एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वैधानिक या सरकारी ढांचे के तहत स्थापित प्रमुख धार्मिक संस्थान धार्मिक मामलों में अपनी स्वायत्तता बनाए रखते हुए भी पारदर्शी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं के तहत काम करते हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित गबन को लेकर विवाद के केंद्र में है।
भाषा सिम्मी नेत्रपाल
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