वाहन कलपुर्जा उद्योग के 2026-27 में 8-10 प्रतिशत दर से बढ़ने का अनुमानः एक्मा
अजय
- 07 Jul 2026, 03:22 PM
- Updated: 03:22 PM
नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) भारतीय वाहन कलपुर्जा उद्योग चालू वित्त वर्ष में घरेलू मांग और मजबूत निर्यात के दम पर 8-10 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। उद्योग निकाय एक्मा ने मंगलवार को यह संभावना जताई।
भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एक्मा) ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग का कुल कारोबार 7.60 लाख करोड़ रुपये (85.9 अरब डॉलर) रहा, जो एक साल पहले के मुकाबले रुपये के संदर्भ में 12.7 प्रतिशत अधिक है।
एक्मा के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने यहां संवाददाताओं से कहा, "भारतीय वाहन कलपुर्जा उद्योग का मध्यम और दीर्घकालिक परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है।"
जेके फेनर (इंडिया) के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सिंघानिया ने कहा कि बढ़ती घरेलू मांग, बुनियादी ढांचा आधारित आर्थिक वृद्धि, विनिर्माण निवेश में विस्तार, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के जरिये वैश्विक एकीकरण और भारत से बढ़ती वैश्विक खरीद इस क्षेत्र के लिए बड़े अवसर पैदा कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 के परिदृश्य पर एक्मा के महानिदेशक विन्नी मेहता ने कहा, "पहली तिमाही काफी मजबूत रही है। यदि यही रफ्तार बनी रहती है तो पूरे साल में आठ से 10 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करना संभव है।"
हालांकि, मेहता ने इस बात को लेकर आगाह किया कि पश्चिम एशिया संकट, अमेरिका में शुल्क संबंधी स्थिति और चीन के व्यापार प्रतिबंध जैसी भू-राजनीतिक चुनौतियां आगे चलकर दबाव बना सकती हैं।
दूसरी तरफ, कार्बन निरपेक्षता पर सरकार का जोर, कई एफटीए, भारतीय विनिर्माण में बढ़ता वैश्विक भरोसा, घरेलू मांग में वृद्धि, बुनियादी ढांचा विकास, उपकरण विनिर्माताओं का क्षमता विस्तार और परिवहन क्षेत्र में नई कंपनियों की मौजूदगी उद्योग के लिए सकारात्मक कारक हैं।
उद्योग संगठन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन मजबूत घरेलू मांग, वाहन उत्पादन में वृद्धि, क्षमता और प्रौद्योगिकी में निरंतर निवेश तथा अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद स्थिर निर्यात वृद्धि से प्रेरित रहा।
पिछले पांच साल में इस उद्योग का आकार दोगुना से अधिक हो गया है और इस दौरान चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 17 प्रतिशत रही, जो भारत के वैश्विक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार के रूप में उभार को दर्शाती है।
पिछले वित्त वर्ष में वाहन कलपुर्जों का निर्यात पांच प्रतिशत बढ़कर 24 अरब डॉलर (2.12 लाख करोड़ रुपये) रहा। यूरोप में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इंजन कलपुर्जे और ड्राइव ट्रांसमिशन एवं स्टीयरिंग की आधे से अधिक हिस्सेदारी रही।
वहीं, आयात 13 प्रतिशत बढ़कर 25.4 अरब डॉलर (2.24 लाख करोड़ रुपये) हो गया। चीन, जापान और जर्मनी कलपुर्जों की आपूर्ति के प्रमुख स्रोत बने रहे।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय
0707 1522 दिल्ली