ब्रिक्स देशों ने मादक पदार्थ तस्करी का मुकाबला करने के लिए 'गुवाहाटी घोषणापत्र' स्वीकार किया
अविनाश
- 07 Jul 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
गुवाहाटी, सात जुलाई (भाषा) ब्रिक्स देशों के मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों के प्रमुखों की यहां हुई दो दिवसीय बैठक के आखिरी दिन मंगलवार को 'गुवाहाटी घोषणापत्र' को अंगीकार किया गया। इसमें सदस्य देशों ने मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों से निपटने के लिए सहयोग मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस घोषणापत्र में सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप जानकारी, खुफिया सूचनाओं और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के समय पर आदान-प्रदान की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
विज्ञप्ति के मुताबिक घोषणापत्र में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कानून लागू करने और नियामकीय प्रयासों को मजबूत करने के लिए नयी प्रौद्योगिकियों, डिजिटल तरीकों और आंकड़ा आधारित विश्लेषण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
ब्रिक्स देशों ने मादक पदार्थ तस्करी के बदलते स्वरूप, कृत्रिम मादक पदार्थों और नए मनोप्रभावी पदार्थों (एनपीएस) के प्रसार, 'प्रीकर्सर केमिकल्स' के गलत इस्तेमाल, उभरती प्रौद्योगिकी और आभासी परिसंपत्ति के दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क द्वारा समुद्री रास्तों और डिजिटल मंचों के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई।
विज्ञप्ति में कहा गया कि सदस्य देशों ने मादक पदार्थों की मांग कम करने के लिए खास पहल को मजबूत करने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और जल्द बहकावे में आ जाने वाले लोगों विशेष तौर पर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा के लिए तथ्य-आधारित, व्यापक और लोगों पर केंद्रित तरीकों को अपनाने की ज़रूरत को रेखांकित किया।
बंद कमरे में हुई उच्च-स्तरीय बैठक में, भारत ने ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ रोधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों से एक ऐसी साझेदारी बनाने का आह्वान किया जो आपसी भरोसे और बिना किसी रुकावट के वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने पर आधारित हो। इस बात पर भी जोर दिया गया कि यह साझेदारी सीमाओं से परे हो और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ गिरोहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम हो।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि देश ने मादक पदार्थ के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं की नीति और नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित तीन साल का खाका (2026–2029) अपनाया है।
विज्ञप्ति के मुताबिक, ''इस रणनीति का उद्देश्य पूरे आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना, बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियानों के जरिए मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकना और इलाज, नशा-मुक्ति व पुनर्वास के उपायों को मजबूत करना है।''
अपनी समापन टिप्पणी में गर्ग ने 21वीं सदी में मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों के एक दूसरे से जुड़े होने और किसी खास अधिकार-क्षेत्र की सीमा से बंधे न होने वाले स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए राष्ट्रीय मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों को मिलकर तंत्र बनाना होगा।
उन्होंने ब्रिक्स देशों से 'गुवाहाटी घोषणा' की भावना को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए नशा-मुक्त दुनिया और एक सुरक्षित व स्वस्थ वैश्विक समुदाय के साझा लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया।
एनसीबी महानिदेशक ने ब्रिक्स ऑनलाइन कार्य समूह बनाने और सीमा-पार प्रशिक्षण की बेहतर पहल के लिए भारत के प्रस्ताव को रेखांकित किया।
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में मादक पदार्थ से जुड़ी मौजूदा स्थिति पर चर्चा की और अहम व उभरती वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित सत्रों में हिस्सा लिया।
ब्रिक्स के गठन के समय ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य थे, लेकिन बाद में इस संगठन का विस्तार किया गया और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ।
यह एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है, जिसमें 11 बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। दुनिया की कुल आबादी में करीब 49.5 प्रतिशत लोग इस संगठन में शामिल देशों में रहते हैं, वहीं ब्रिक्स वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में 26 प्रतिशत योगदान करता है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
0707 2004 गुवाहाटी