भारत में एफडीआई प्रवाह 2025 में 44 प्रतिशत बढ़कर 39 अरब डॉलर पहुंचाः संयुक्त राष्ट्र
अजय
- 07 Jul 2026, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, सात जुलाई (भाषा) भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह वर्ष 2025 में 44 प्रतिशत बढ़कर 39 अरब डॉलर हो गया, जिससे निवेश के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की 'विश्व निवेश रिपोर्ट 2026' के मुताबिक, 2025 में वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में मजबूती दिखी लेकिन सुधार की रफ्तार अब भी नाजुक बनी हुई है।
रिपोर्ट कहती है कि पिछले साल वैश्विक एफडीआई प्रवाह छह प्रतिशत बढ़कर 1.6 लाख करोड़ डॉलर रहा। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 11 प्रतिशत और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में दो प्रतिशत बढ़ा।
दक्षिण एशिया में एफडीआई प्रवाह 34 अरब डॉलर से बढ़कर 46 अरब डॉलर हो गया। इसमें भारत में निवेश की प्रमुख भूमिका रही, जहां एफडीआई 44 प्रतिशत बढ़कर 39 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
हालांकि, रिपोर्ट कहती है कि भारत में कुल एफडीआई प्रवाह बढ़ने के बावजूद परियोजना संकेतक अधिक 'सतर्क निवेश चक्र' की तरफ इशारा करते हैं।
अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच देश में नई परियोजनाओं में निवेश का कुल मूल्य 2024 के 111 अरब डॉलर से घटकर 2025 में करीब 74 अरब डॉलर रह गया और परियोजनाओं की संख्या में भी मामूली गिरावट आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 2025 में एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की, जिसे सेवा क्षेत्र से आगे निवेश आधार के विस्तार और उन्नत विनिर्माण को गति देने वाली सक्रिय नीतियों का समर्थन मिला।
इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और संबंधित विनिर्माण गतिविधियों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए भारत ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्ट-अप इंडिया' और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम जैसे कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली, 'इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक' और नियामकीय बोझ कम करने के प्रयासों जैसे सुधारों ने निवेश माहौल को अधिक अनुकूल बनाया है।
अंकटाड ने कहा कि संशोधित एफडीआई व्यवस्था ने विदेशी निवेशकों के लिए खुलापन बढ़ाया है, जबकि परियोजना विकास प्रकोष्ठ और परियोजना निगरानी समूह जैसे संस्थागत तंत्र मंजूरी और क्रियान्वयन को सुगम बना रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि इन प्रयासों से खासकर विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की गति को बढ़ावा मिला है। हालांकि, 2025 में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण यह रुझान कुछ धीमा पड़ा।
विनिर्माण क्षेत्र में घोषित निवेश मूल्य 2024 के लगभग 65 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 27 अरब डॉलर रह गया, जबकि सेवा क्षेत्र में निवेश मजबूत बना रहा।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वर्ष 2025 में सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा, जो डिजिटल बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। वित्तीय सेवाओं में भी गतिविधियां बढ़ी हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि शुल्क अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में बदलाव और वैश्विक निवेश माहौल की कमजोरी के कारण नई विनिर्माण एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का आकार प्रभावित हो रहा है।
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0707 2020 संयुक्त राष्ट्र