मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के कारोबारियों को भारत के ''बेजोड़'' विकास अवसरों का लाभ उठाने का दिया न्योता
मनीषा
- 09 Jul 2026, 11:44 AM
- Updated: 11:44 AM
(परिवर्तित स्लग के साथ लीड)
(तस्वीरों के साथ)
मेलबर्न, नौ जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रस्तावित भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की बृहस्पतिवार को वकालत करते हुए कहा कि इससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध ''नई ऊंचाई'' पर पहुंचेंगे।
व्यापार मंच को संबोधित करते हुए मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत में निवेश के लिए भी आमंत्रित किया।
उन्होंने कहा कि भारत विमानन, वित्तीय सेवाओं, महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में वृद्धि के लिए ''बेजोड़ अवसर'' प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री तीन दिवसीय यात्रा पर बुधवार को ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रक्षा, ऊर्जा और व्यापार संबंधों को मजबूत करना है।
मोदी ने मेलबर्न में 'ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम' और 'इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस' कार्यक्रम को अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के साथ संयुक्त रूप से संबोधित किया।
दोनों कार्यक्रमों में कारोबार जगत के दिग्गजों, ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सुपरएन्युएशन फंड और संस्थागत निवेशकों के प्रतिनिधियों तथा ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।
मोदी ने ऑस्ट्रेलियनसुपर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पॉल श्रोडर द्वारा कंपनी की ओर से भारत में 50 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा का स्वागत किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, '' यह भारत की वृद्धि तथा सुधारों की दिशा में वैश्विक विश्वास की एक और झलक है। यह हमारी गतिशील अर्थव्यवस्था द्वारा वैश्विक निवेशकों को उपलब्ध कराए जा रहे अपार अवसरों को भी दर्शाता है।''
कंपनी के अनुसार, ऑस्ट्रेलियनसुपर ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा 'सुपर फंड' है और यह 36 लाख से अधिक लोगों की सेवानिवृत्ति बचत के रूप में 41,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करता है।
अपने संबोधन में मोदी ने वर्ष 2022 में आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में हुई वृद्धि पर संतोष व्यक्त किया।
व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए मोदी ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को जल्द अंतिम रूप देने का आह्वान किया। दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से लाभकारी सीईसीए की दिशा में काम कर रहे हैं।
सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, नीतिगत सुधार, डिजिटल बदलाव और बढ़ रहा नवाचार परिवेश ऑस्ट्रेलियाई साझेदारों के लिए नए कारोबारी अवसर उत्पन्न कर रहे हैं।
उन्होंने भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्थाओं के बीच परस्पर पूरकता का भी उल्लेख किया और विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन, बुनियादी ढांचा, कृत्रिम मेधा (एआई), वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) और डिजिटल आर्थिक गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत में उपलब्ध व्यापक अवसरों को रेखांकित किया।
मोदी ने कहा कि भारत का विशाल आकार और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता दोनों देशों के लिए लाभकारी स्थिति है। ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को उन्होंने भारत में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
प्रधानमंत्री ने भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की बढ़ती मौजूदगी का स्वागत किया और कहा कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार तथा कौशल विकास के क्षेत्र में गहरा सहयोग न केवल दोनों देशों की प्रतिभाओं को भविष्य के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने में भी मदद करेगा।
सीईओ फोरम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 'इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस' कार्यक्रम को भी संबोधित किया। इसमें दोनों देशों के 200 से अधिक मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) और कारोबारी दिग्गजों ने भाग लिया।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्वाभाविक तालमेल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए समान दृष्टिकोण, दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध और गहरी राजनीतिक समझ ने द्विपक्षीय व्यापारिक साझेदारी के लिए अनुकूल आधार तैयार किया है।
उन्होंने वर्ष 2022 के आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के आधार पर व्यापार एवं निवेश संबंधों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को जल्द अंतिम रूप देने का आह्वान किया।
मोदी ने उद्योग जगत के दिग्गजों से दोनों पक्षों की परस्पर पूरक क्षमताओं का लाभ उठाने और विशेष रूप से दुर्लभ खनिज तत्वों, लिथियम, बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम मेधा और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के क्षेत्रों में वैश्विक समाधान विकसित करने का आग्रह किया।
मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय कारोबारी संबंधों को अगले स्तर तक पहुंचाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत के राज्य और ऑस्ट्रेलिया के प्रांत अपनी-अपनी प्रमुख क्षमताओं के आधार पर ''गतिशील आर्थिक साझेदारियां'' करें।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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