जेल में बच्चे को जन्म देने का सदमा बर्दाश्त करने लायक नहीं: निदा को जमानत देते हुए अदालत की टिप्पणी
नरेश
- 09 Jul 2026, 03:50 PM
- Updated: 03:50 PM
नासिक, नौ जुलाई (भाषा) नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़े एक मामले में गर्भवती निदा खान को जमानत देते हुए स्थानीय अदालत ने कहा कि जेल में बच्चे को जन्म देने की पीड़ा किसी भी महिला के लिए असहनीय है।
अदालत ने इस संदर्भ में भगवान कृष्ण के जन्म का भी उल्लेख किया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (नासिक रोड) के. जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि अब तक की जांच से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि खान ने सह-आरोपियों की मदद से कथित तौर पर "पीड़िता को वैचारिक रूप से प्रभावित करने" का प्रयास किया और उसकी "सोच तथा धर्म बदलने की कोशिश की"।
अदालत ने यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण से जुड़े मामले की जांच का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपियों ने पीड़िता को यह विश्वास दिलाने का भी प्रयास किया कि ''हिंदू धर्म में आपत्तिजनक कहानियां हैं।''
करीब दो महीने पहले गिरफ्तार की गई निदा खान को अदालत ने छह जुलाई को जमानत दे दी थी। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आदेश बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराया गया। न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि प्राथमिकी में खान की कथित भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है।
अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को ध्यान में रखते हुए खान की जमानत याचिका स्वीकार कर ली कि वह पांच महीने की गर्भवती है।
अदालत ने कहा, ''भगवान कृष्ण के जन्म की तरह जेल में बच्चे को जन्म देने की पीड़ा और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक किसी भी महिला के लिए असहनीय होता है।''
अदालत ने कहा, ''ऐसी अत्यंत पीड़ादायक स्थिति से बचने तथा बच्चे के जन्म और उसके समग्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए आवेदक-आरोपी के पक्ष में न्यायिक विवेकाधिकार का प्रयोग करना न्यायोचित होगा।''
न्यायाधीश ने कहा कि आवेदक के गर्भवती होने के साथ-साथ मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में उसे न्यायिक हिरासत में बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने खान को 75,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक सक्षम जमानतदार पर जमानत दे दी।
नासिक पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) टीसीएस इकाई में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास, धार्मिक भावनाएं आहत करने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ मामलों की जांच कर रहा है।
यह मामला देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज उस प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 (छल आदि के माध्यम से यौन संबंध बनाना), धारा 65 (यौन उत्पीड़न) और धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पीड़िता के दलित होने के कारण आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी लगाई गई हैं।
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